
PATNA:- आरकेड बिजनेस कॉलेज में आयोजित सेमिनार में सोनू शर्मा ने कहा- नॉलेज नहीं, इम्प्लीमेंटेशन जरूरी है
पटना-12 मार्च। देश भर के युवाओं के रोल माडल एवं दिग्गज मोटिवेटर व लेखक सोनू शर्मा ने शनिवार को आरकेड बिजनेस कॉलेज के छात्रों के बीच थे। खचाखच भरे स्थानीय बापू सभागार में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस देश का 95% पैसा केवल 5% लोगों के पास है और 5% पैसा बाकी के 95% लोगों के पास. देश में केवल 8% लोग ऐसे हैं, जिनकी मासिक आय 10,000 रूपए से ऊपर है। क्या कभी आपने सोंचा है कि आखिर वो कौन सी चीज है,जो उनको इतना सफल बनाती है? हमारी पृष्ठभूमि एक है, हम भी मिडल क्लास फॅमिली से सम्बंधित होते हैं,फिर भी आज गूगल और फेसबुक के हेड को करोड़ों में वेतन कैसे मिलता है। इसका कारण है आपका एटीच्युड यानी नजरिया। जब एक बड़ी कम्पनी के सीईओ से पूछा गया कि लाखों करोड़ों का वेतन पाने वाले लोगों से जॉब इंटरव्यू के दौरान क्या पूछा जाता है,तो उन्होंने कहा कि हम उनकी शिक्षा और तजुर्बे से सम्बंधित कोई सवाल नहीं करते, बल्कि एक ही सवाल किया जाता है कि आज तो यह कम्पनी ठीक चल रही है,परन्तु भविष्य में कभी अगर मुसीबत में आ जाये,तो आप इसे कैसे बचाओगे। सोनू शर्मा ने आगे कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितना और क्या जानते हैं, बल्कि फर्क इस बात से बढता है कि उसका इम्प्लीमेंटेशन हम कितना करते हैं। ज्ञान से जीवन में बदलाव नहीं होता,उसके कार्यावयन से होता है। उन्होंने कहा कि जीवन में सकारात्मक बदलाव में हमेशा समय लगता है. आज यह संस्थान 7 छात्रों से प्रारंभ हुआ। तथा आज इसमें 1000 छात्र हैं. इसे पूरा करने में सालों लगे। आपके जीवन में भी बड़ा बदलाव जरुर आएगा, परन्तु आपको इसमें सालों का लगातार श्रम देना होगा. यह भी समझना जरुरी है कि जिन बातों को हम अपने जीवन में असंभव समझ कर छोड़ देते हैं, उनको दूसरे लोग साबित कर हमें वैसा काम करने को प्रेरित करते हैं।
वर्ष 2010 से पहले किसी ने नहीं सोंचा था कि क्रिकेट में सबल सेंचुरी लगायी जा सकती है, परन्तु सचिन तेंदुलकर ने ऐसा कर दिखाया. उसके बाद, वीरेन्द्र सहवाग को भी लगा कि ऐसा किया जा सकता है. फिर उन्होंने भी सबल सेंचुरी लगायी। फिर, रोहित शर्मा ने सोंचा कि मैं पीछे कैसे रहूँ. तो, उन्होंने तो तीन बार डबल सेंचुरी लगा दी। इसलिए जीवन में हमेशा बड़ा सोंचिए, तभी कुछ बड़ा होगा। जंगल के जानवरों में जिराफ सबसे ऊँचा होता है,हाथी सबसे भारी,चीता सबसे तेज एवं लोमड़ी सबसे चालाक,परन्तु इनमें कोई भी जंगल का राजा नहीं होता। शेर के पास यह सब नहीं है,परन्तु उसके पास एक ही चीज है–एटीच्युड,जो उसे राजा बनने की काबिलियत देता है।
उन्होंने कहा कि नकारात्मक मत सोंचिये,क्योंकि सकारात्मक सोंच आपको सफलता की पूरी गारंटी तो नहीं दे सकता,परन्तु नकारात्मक सोंच आपकी असफलता की गारंटी जरुर है। बिहार में पहली बार पधारे सोनू शर्मा ने छात्रों के प्रश्नों का भी जवाब दिया। एक छात्र के इस प्रश्न पर कि भटकाव को कैसे रोका जाये। श्री शर्मा ने कहा कि अपने आवारा मन को नियंत्रित करने का सरल उपाय है कि हम छोटे छोटे प्रयोग करें। हम निश्चय करें कि आज पूरा दिन हम सोशल मीडिया को नहीं देखेंगे या बालकनी में आधा घंटा खड़े रहेंगे। तथा निचे नहीं देखेंगे या आज पूरे दिन कुछ नहीं खायेंगे। इससे आपके अन्दर का आवारा मन कमजोर होगा और आपकी इच्छा शक्ति मजबूत होगी।
इस अवसर पर पधारे पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो आर के सिंह ने कहा कि बिहार के छात्र होनहार हैं। तथा उन्होंने देश दुनिया में खुद को समय समय पर साबित किया है. उनको सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है और ऐसे कार्यक्रम उनके मनोबल को बढ़ावा देते हैं, उनके व्यक्तित्व को निखारते हैं। कॉलेज के निदेशक व करियर काउंसलर आशीष आदर्श ने सोनू शर्मा व पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो आर के सिंह को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।



