
MADHUBANI:- चिकित्सकों ने बायोमेट्रिक हाजिरी किया विरोध
मधुबनी-29 सितंबर। जिले भर के सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों ने गुरुवार को काला बिल्ला लगाकर कार्य किया। इसमें आइएमए और भासा के बैनरतले सरकारी चिकित्सक शामिल हुए। भासा के जुड़े चिकित्सकों ने काला बिल्ला लगाकर सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दी। भासा के सचिव डॉ. कुणाल कौशल ने बताया कि राजकीय नेतृत्व के आह्वान पर गुरुवार को विरोध के रूप में मनाया गया। विरोध 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक जारी रहेगा इस अवधि में चिकित्सक काला बिल्ला लगाकर कार्य करेंगे। छह अक्टूबर को ओपीडी का बहिष्कार करेंगे यदि संघ की मांगों पर सरकार द्वारा विचार नहीं किया जाएगा, तो 9 अक्टूबर की संघ की कार्यवाही में आगे की रणनीति तय की जाएगी। डॉ कुणाल ने बताया राज्य में चिकित्सकों का ड्यूटी निर्धारित नहीं है चिकित्सकों का कार्य नाइट शिफ्ट के साथ चलता है इसके साथ ही डॉक्टरों को आकस्मिक ड्यूटी करनी पड़ती है,जो ना शारीरिक बल्कि मानसिक थकान को भी बढ़ाता है।
चिकित्सकों को अपडेट रहने के लिए निरंतर अध्ययन करते रहना पड़ता है। चिकित्सकों को चिकित्सकीय कार्य के अलावा इंजूरी,पोस्टमार्टम एवं उससे संबंधित न्यायालय में गवाही देने जाना पड़ता है किसी भी स्वास्थ्य संस्थान को 24/7 की तर्ज पर चलाने के लिए कम से कम 4 चिकित्सकों की आवश्यकता है चिकित्सकों की न्यायालय में गवाही, अवकाश, अस्वस्थ होने जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है इसलिए एक स्वास्थ्य संस्थानों में अतिरिक्त चिकित्सा की यानी कम से कम पांच चिकित्सकों की आवश्यकता है, साथ ही चिकित्सकों को टेलीमेडिसिन कंसल्टेशन का भी कार्य करना पड़ता है राज्य में चिकित्सकों की कमी एवं पदस्थापित चिकित्सकों के अध्ययन अवकाश में चले जाने के कारण यह कमी और भी बढ़ जाती है, नतीजतन कई पीएससी में मात्र दो या तीन चिकित्सक पदस्थापित है राज्य सरकार द्वारा घोषित राजपत्रित यहां तक कि आकस्मिक अवकाश का उपभोग करना भी एक समस्या के रूप में है इसके बावजूद पीएचसी किसी प्रकार चलाया जा रहा है, आवासीय सुविधा नहीं रहने के कारण रात्रि 8 बजे के बाद अस्पताल पहुंचना एवं छोड़ना भी सुरक्षा के दृष्टि से एक अलग समस्या है ऐसी स्थिति में चिकित्सकों के लिए बायोमेट्रिक प्रणाली द्वारा उपस्थिति दर्ज कराने की अनिवार्यता तब तक व्यवहारिक नहीं होगा जब तक पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों का पदस्थापन ना हो।



