बिहार

MADHUBANI:- गोदामों पर तौलकर नहीं दिया जाता है अनाज, पीडीसी और स्कूलों को 42 से 47 किलो ही प्रति बैग मिलता है अनाज, विभिन्न योजनाओं के तीन लाख लाभुकों के चार लाख क्विंटल अनाज का बंदरबांट

मधुबनी- 08 सितंबर। जिले के गोदामों पर बिना तौल के ही अनाज की सप्लाई की जा रही है। जयनगर स्थित भारतीय खाद्य निगम से ही बैग में अनाज कम होने की शुरूआत होती है और यह अंतत: गरीब और असहाय लाभुकों तक जारी रहता है। एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम ) से राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) के मुख्य ट्रांसपोर्टर के द्वारा इसके जिले में स्थित विभिन्न गोदामों तक पहुंचाया जाता है। इसके लिए जिस  ट्रांसपोर्टर को लगाया जाता है, वहीं से अनाज की हेरफेरी शुरू हो जा रही है। इन ट्रांसपोर्टर के द्वारा निविदा में उल्लेखित संसाधनों को प्रयोग में नहीं लाया जा रहा है। इसका परिणाम होता है कि हर माह अनाज की आपूर्ति की प्रक्रियाओं में बाधा उत्पन्न होती है। बताया जा रहा है कि एफसीआई से उठाव और एसएफसी गोदाम तक अनाज लाने में ही बैग की हेराफेरी की जाती है। पीडीएस दुकानदारों को अनाज वितरण के लिए प्रति क्विंटल 70 रुपये दिये जाते हैं। शिकायत है कि इसमें से 65 रुपये प्रति क्विंटल अनाज लोडिंग, अनलोडिंग और ऑफीस खर्च मद में ही कथित अवैध रुप से ले लिया जाता है। जबकि आपूर्ति विभाग खुद लोडिंग और अनलोडिंग के लिए राशि संबंधित ट्रांसपोर्टर को देती है।
बिना तौल भेजा जाता है अनाज
जिले के प्रखंड के निर्धारित गोदाम से एसएफसी द्वारा ही नियुक्त डीएसडी (डोर स्टेप डिलिवरी) ट्रांसपोर्टर के द्वारा पीडीएस गोदाम तक अनाज पहुंचाया जाता है। इन गोदामों से पीडीएस को तौल कर अनाज भेजने का प्रावधान है। लेकिन अधिकतर गोदामों पर तौल का सिस्टम खराब पड़ा है या फिर तौल किया ही नहीं जाता है। पीडीएस दुकानदारों ने बताया कि जब तौल पर जोर दिया जाता है तो मशीन को खराब ही कर दिया जाता है। अधिकतर स्थानों पर बिना तौल के ही अनाज दिया जाता है। बेनीपट्टी, रहिका, बिस्फी, कलुआही, फुलपरास, लौकही, खुटौना सहित अन्य प्रखंड के गोदाम से बिना तौल के ही अनाज पहुंचाया पीडीएस को पहुंचाया जा रहा है। इसतरह की गड़बड़ी का प्रमुख कारण यह है कि अधिकतर गोदाम बिचौलिये के सहारे संचालित है। गोदाम मैनेजर का कभी कभार ही यहां पर दर्शन होता है। इस वजह से यहां से प्रति बैग दो से पांच किलो कम अनाज पीडीएस को आपूर्ति होता है। यहीं हालत स्कूलों में की जा रही चावल की आपूर्ति का हाल है। एचएम को कम तौल अनाज दिया जाता है तो एचएम बच्चों की अधिक संख्या दिखाकर अनाज व राशि का खर्च दिखाकर अपनी कमाई कर रहे हैं। अंतत: इसका खामियाजा गरीब और असहाय लाभुकों को भुगतना पड़ रहा है। बच्चों के एमडीएम के नाम पर लाखों रुपए की हर माह हेराफेरी हो रही है।
क्या कहते हैं अधिकारी
एसएफसी जिला प्रबंधक पंकज कुमार ने बताया कि पीडीएस तक अनाज सही तौल के साथ पहुंचाने का निर्देश सभी ट्रांसपोर्टर को दिया गया है। इसमें गड़बड़ी की शिकायत पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। संबंधित गोदाम प्रबंधक को इसके लिए सख्त आदेश दिये गये हैं। कहीं से शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जायेगी।
एमडीएम की लगातार हो रही मॉनिटरिंग
डीईओ जावेद आलम ने बताया कि स्कूलों में संचालित एमडीएम की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। बच्चों की संख्या को लेकर लगातार क्रॉस चेक भी किया जाता है। इसमें गड़बड़ी होने पर कार्रवाई भी हो रही है।
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