
MADHUBANI:- पंडौल प्रखंड का 72 सरकारी तालाबों का अतिक्रमण, मछली पर संकट: चंदेश्वर मुखिया
मधुबनी- 13 अप्रैल। संस्कृति, समृद्धि और जल संरक्षण के प्रतीक जिले के पंडौल प्रखंड के 72 सरकारी तालाबों पर अतिक्रमण खतरा बढ़ता जा रहा है। तालाबों के अतिक्रमण से इसके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। पंडौल प्रखंड में कदम-कदम पर यहां तालाब की बात अब कहानी बनती जा रही है।साल दर साल उपेक्षा का सिलसिला तालाबों के स्वरूप को बदलता चला गया। तालाब व उसकी जमीन अतिक्रमणकारियों के कब्जे में चला गया है। उक्त बातें पंडौल मत्स्यीजीवी सहयोग समिति के मंत्री चंदेश्वर मुखिया ने कहीं। मंत्री ने कहा कि सैरात सूची में शामिल पंडौल प्रखंड के अतिक्रमित 72 तालाबों को बचाना होगा।
उन्होंने कहा कि जंगलझाड़ में तब्दील ऐसे तालाब सूखने के करीब पहुंच गया है। पंडौल प्रखंड के बटलोहिया गांव का राजा तालाब जीर्णोद्धार की जरूरत है। इस तालाब में जंगल-झाड़ होने से बरसात में वर्षा जल का संरक्षण नहीं होता है। अतिक्रमणकारियों ने इस तालाब के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर दिया है। एक दशक पूर्व तक इस तालाब की काफी अहमियत थी। तालाब के चहुंओर झुग्गी-झोपड़ी नजर आ रहे हैं। लोहट चीनी मिल के निकटराजा तालाब सहित प्रखंड के अन्य तालाबों का दायरा सिमटता जा रहा हैं। तालाबों व उसके भिडे का अतिक्रमण फैलता चला गया।
सरकारी तालाबों के जमीन को भराकर घर बनते जा रहे हैं। यह सिलसिला यू ही जारी रहा तो आने वाले वर्षो में तालाबों का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर पहुंच जाएगा। मंत्री ने बताया कि बदहाल तालाबों का भी बंदोबस्त शुल्क जमा करने के बाद भी तालाब से मछली, मखान का उत्पादन नहीं हो रहा है। कई तालाब पूरी तरह सूख गए हैं। कई तालाब स्थानीय लोगों द्वारा जबरन कब्जा कर लिया गया है। अनेकों तालाबों का अतिक्रमण का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। सालों भर लोगों को स्नान, पशुओं को प्यास बुझाने और वर्षा जल के संचय वाले तालाबों की बदहाली को दूर करने में सरकारी प्रयास नाकाफी साबित हो रहा है। सरकारी स्तर पर रखरखाव की उदासीनता तालाबों की हालत बदतर हो गई है।



