
MADHUBANI:- दोनवारी गांव में 237 वर्षों से माता के दर्शन के लिए नेपाल से भी आते हैं श्रद्धालु
मधुबनी- 02 अक्टुबर। लदनियां प्रखंड अंतर्गत कुमरखत पूर्वी पंचायत के दोनवारी गांव में 237 वर्षों से शारदीय नवरात्र मनाया जाता है। जहां पड़ोसी देश नेपाल से भी सैकड़ों के संख्या में श्रद्धालु माता की दर्शन करने आते हैं। उक्त गांव में सबसे पहले 1785 ईस्वी में स्वः बबरैया कामत ने शारदीय नवरात्र पूजा शुभारंभ किया था। पूजा कमिटी के अध्यक्ष चन्द्रशेखर कामत, कुमरखत पूर्वी के मुखिया व पूजा कमिटी के सचिव नवीन कुमार एवं दुर्गा पूजा के स्थापक बबरैया कामत के वंशज पूजा कमिटी के सदस्य रामाशीष कामत का कहना है कि यहां अष्टमी तिथि को निशा पूजा करने की परम्परा है।अष्टमी तिथि को माता दुर्गा की दिवा पूजा की परम्परा है। अष्टमी तिथि को दिवा पूजा के पश्चात माता की पट खुलती है। यहां दुर्गा पूजा की खाश विशेषता है कि मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु अष्टमी तिथि को सुबह से दोनवारी के आसपास पथलगाढ़ा,कमतौलिया, मोतनाजे, जानकीनगर सहित गांव से सैकड़ों के संख्या में बूढ़े,बच्चे एवं नौ जवान अपने घर में इष्टदेव को पूजा कर गाजे बाजे के साथ दंड प्रणाम देकर माता मंदिर तक पहुंचते हैं। माता को चढ़ौना चढ़ाते हैं।
पूजा कमिटी के अध्यक्ष, सचिव एवं ग्रामीणों का कहना है कि करीब 237 वर्षों से शारदीय नवरात्रा मनाया जाता है। दुर्गा मंदिर परिसर में ही माता बिषहरा एवं बाबा भक्तेश्वर नाथ का मंदिर है। माता दुर्गा जी मंदिर का निर्माण पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. देवनारायण यादव एवं उनकी पत्नी स्व.भुवनेश्वरी देवी के नाम पर उनके वंशज ने कराया है। जबकि माता बिषहरा मंदिर कोलकाता कमिटी ने किया एवं बाबा भक्तेश्वर नाथ महादेव मंदिर निर्माण दिल्ली कमिटी के सहयोग से ग्रामीणों द्वारा कराया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनवारी एवं महुलिया गांव के पूर्व में जंगल था। जहां धामी थान आस्था का केन्द्र है। एक समय स्वः बबरैया कामत खेत देखने गया जहां अचानक नजर उक्त जंगल में बाघ पर पड़ा। बाघ को अपनी ओर आते देख माता दुर्गा के नाम लेते बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा। कुछ देर के बाद आंख खुली तो वहां से बाघ चला गया था। उन्होंने उस वक्त ही मन में संकल्प लिया कि हम प्रति वर्ष शारदीय नवरात्र में माता दुर्गा जी की प्रतिमा स्थापित कर विधिवत पूजा करुंगा। उन्होंने अपने घर के समीप ही माता दुर्गा जी के नाम से जमीन निबंधित कर दिया। उनलोगों का कहना है कि माता की एक और चमत्कार है। इस गांव के सटे उतर नेपाल में सुब्बा औरही गांव है। जो सुब्बा लाल यादव के नाम पर है। सुब्बा लाल एक मामले में नेपाल के जेल में बन्द था। लगभग तय था कि उसे कठोर सजा सुनाई जायेगी। वृज लाल सुब्बा की माता जी की मंदिर में दुर्गा माता से अपनी अर्जी लगाई। माता की चमत्कार ही अजीब हुआ। उनका बेटा वृज लाल सुब्बा जो कारागार में बन्द था। हाथ पैर में बेरी लगा हुआ अगले सुबह माता दरबार में हाजिर था। उनकी माता ने मनोबांछित फल मिलने पर माता दुर्गा को चांदी का भव्य मुकुट और सोने की नथिया चढ़ाई। जो मुकुट आज भी पूजा कमिटी के पास सुरक्षित है।



