मधुबनी- 27 जुलाई। बिगत तीन महिनों से जिले के रहिका,घोघरडीहा,बिस्फी सहित विभिन्न प्रखंडों में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत कार्य पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। इससे आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रमाण पत्र के लिए महीनों से चक्कर काट रहे जरूरतमंद लोग अब सरकारी उदासीनता से निराश हो चुके हैं। जबकि से जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने की नई व्यवस्था बनायी गयी है, तब से दो बार जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने वाले फार्म बदले जा चके हैं। दरअसल, राज्य सरकार ने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने की प्रक्रिया में व्यापक बदलाव किया है। पूर्व में यह प्रमाण पत्र प्रखंड स्तर पर सांख्यिकी पदाधिकारी के माध्यम से बीडीओ की अनुमति से निर्गत होते थे। लेकिन नई व्यवस्था में अब 30 दिनों के भीतर के मामले पंचायत सचिव को सौंपे गए हैं। वहीं 30 दिनों से अधिक पुराने मामलों में फाइल अनुमोदन के लिए एसडीओ कार्यालय भेजनी होती है। हालांकि इस नई व्यवस्था को लागू किए तीन महीने हो चुके हैं, फिर भी अब तक फील्ड स्तर पर स्पष्ट गाइडलाइंस नहीं पहुंची है। हैरत की बात यह है कि पंचायत सचिवों को स्पष्ट निर्देष प्राप्त नही हो पाया है, जिस कारण पंचायत सचिव भी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने को लेकर परेषान नजर आते हैं। एक महिना पुराने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए पंचायत सचिवों को जिला मुख्यालय का चक्कर काटने पड़ रहे हैं। एक पंचायत सचिव ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि एक महीना से अधिक पुराने प्रमाण पत्र निर्गत करने को लेकर अभी तक कोई ठोस निर्देश नहीं मिला है। ऐसे में हम लोग कुछ कर ही नहीं सकते। इधर लोगों का आरोप है कि सरकारी कार्यालयों की लापरवाही के कारण छात्रों का एडमिशन,पासपोर्ट आधारकार्ड,राशनकार्ड सहित जरूरी योजनाओं का लाभ उठाने में उन्हें भारी दिक्कत हो रही है। सिर्फ घोघरडीहा प्रखंड क्षेत्र की बात करें, तो इस प्रखंड क्षेत्र में भी इसी तरह का मामला है। इस संबंध में घोघरडीहा के प्रखंड विकास पदाधिकारी धीरेंद्र कुमार धीरज ने बताया कि अभी सभी पदाधिकारी मतदाता सूची विशेष गहन पुननिरीक्षण अभियान में व्यस्त हैं। यह कार्य पूरा होने के बाद ही हम इस मुद्दे कुछ बता सकेंगे। घोघरडीहा प्रखंड क्षेत्र के त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि भी इस समस्या से परेशान बने हुए हैं। पंचायत के जनता अपने प्रतिनिधियों से सवाल कर रही है कि यदि प्रमाण पत्र जैसी बुनियादी सुविधा ही महीनों तक ठप रहेगी, तो फिर सरकारी व्यवस्था का लाभ आम नागरिकों को कैसे मिलेगा?
