बिहार

MADHUBANI:- उपचाराधीन टीबी मरीजों के सहायता राशि का जल्द करें भुगतानः डीएम

मधुबनी-07 फरवरी। जिला स्वास्थ्य विभाग एवं जिला यक्ष्मा विभाग 2025 तक टीबी उन्मूलन हेतु संकल्पित है। जिला की वस्तुस्थिति एवं उन्मूलन में आ रही चुनौतियों को जिलाधिकारी के संज्ञान में लाने के उद्देश्य से सोमवार को जिला टीबी फोरम की बैठक का आयोजन जिलाधिकारी अमित कुमार की अध्यक्षता में जिलाधिकारी सभागार में संपन्न हुआ।

बैठक में जिला टीबी फोरम के सभी सदस्यों के अलावा,एसीएमओ डॉ आर के सिंह,सीडीओ डॉक्टर जीएम ठाकुर केयर इंडिया के डीटीएल महेंद्र सिंह सोलंकी,डीपीसी पंकज कुमार,अनिल कुमार सहित कई चिकित्सक एवं टीबी चैंपियन उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने उपचाराधीन टीबी मरीजों को पोषण के रूप में दी जानी वाली सहायता राशि की वस्तुस्थिति की जानकारी ली। तथा जिला में भुगतान की स्थिति की समीक्षा करते हुए अविलंब सभी उपचाराधीन टीबी मरीजों को पोषण के रूप में दी जानी वाली सहायता राशि के भुगतान के निर्देश दिए। जिलाधिकारी के संज्ञान में लाया गया कि जिले में अभी चिन्हित टीबी मरीजों की संख्या 3867 है, जिसमे सरकारी संस्थानों से 1955 तथा प्राइवेट संस्थानों से 1912 मरीजों को चिन्हित किया गया है। जिसमे 2956 मरीजों को निश्चय पोषण योजना के तहत भुगतान किया जा चूका है। तथा शेष मरीजों को जल्दी ही राशि उनके खाते में जमा करा दी जाएगी। ज्ञात हो की मरीजों के उपचार के दौरान उन्हें सरकार द्वारा हर महीने 500 रुपये पोषण राशि के रूप में दिए जाने का प्रावधान है।


निजी चिकित्सकों करेंगे टीबी मरीजों का सत्यापन व निश्चय पोर्टल पर अपलोड—


बैठक में जिलाधिकारी के संज्ञान में लाया गया कि जिला के कई निजी चिकित्सक टीबी मरीजों का उपचार तो करते हैं, परंतू विवरण एवं जानकारी निश्चय पोर्टल पर अपलोड नहीं करते हैं जो की अनिवार्य है। जिलाधिकारी ने सीडीओ डॉक्टर जीएम ठाकुर को निर्देश दिए कि अविलंब निजी चिकित्सकों के साथ बैठक कर उन्हें उक्त कार्य करने हेतु निर्देश दें। तथा उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित करें। जिलाधिकारी ने कहा उक्त बैठक के उपरांत भी अगर निजी चिकित्सक आदेश की अवहेलना करते हैं तो उनपर कार्यवाही की जाएगी।


जिलाधिकारी ने जाना टीबी चैंपियन का अनुभव—


बैठक में शामिल तीन टीबी चैंपियन से जिलाधिकारी ने अपने टीबी से जंग का अनुभव साझा करने को कहा। टीबी चोंपियन सनीचर,विजय,दशरथ ने बताया कि वह टीबी से ग्रसित हुआ। परंतू कई जगहों पर उपचार के बावजूद उन्हें नियमित अंतराल पर टीबी संक्रमण से जूझना पड़ा. सही टेस्ट की सुविधा उपलब्ध न हो पाना इसकी एक प्रमुख वजह रही ने बताया कि अंततः वो टीबी सरकारी अस्पताल में समुचित इलाज कराने के बाद संक्रमण से मुक्त हुआ। तथा अब समुदाय को और टीबी मरीजों की रोग के बारे में जागरूक करना एवं मरीजों को उपचार उपलब्ध कराना उनके जीवन का उद्देश्य है। वहीं जिलाधिकारी ने फोरम के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि रोगी कल्याण समीति की आयोजित होने वाली बैठकों में यक्ष्मा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नियमित रूप से शिरकत करें। तथा जन प्रतिनिधियों को भी उसमे शामिल कर उन्हें टीबी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित करें।

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