
भगवान महावीर ने दुनिया को दिया शांति, संयम और आत्म-नियंत्रण का संदेश,मानवता के लिए वरदान
मधुबनी- 31 मार्च। मैथिल विकास प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष मोद नारायण झा ने कहा कि भारत अवतार और महान ऋषि-मुनियों की पवित्र भूमि रही है। इस पवित्र भूमि पर जन्म लेने वाले महान ऋषि-मुनियों ने देश दुनिया को सदैव जीवन जीने की नई दिशा प्रदान की है। ऐसे ही है बिहार के वैशाली में जन्म लेने वाले हमारे भगवान महावीर। आज भगवान महावीर की जयंती मनाकर मानव जाति धन्य मान रही है।
उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने दुनिया को शांति, संयम और आत्म-नियंत्रण का संदेश दिया।आज के समय में भगवान महावीर की शिक्षाएं और भी प्रासंगिक हो जाती हैं। आज के समय में जब तनाव और हिंसा बढ़ रही है। ऐसे दौर में भगवान महावीर के विचारों को अपनाना मानवता के लिए वरदान होगा। उनकी शिक्षा समाज को अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, तप, शांति और सद्भाव का संदेश देती हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व में वैशाली में हुआ। उनके पिता राजा सिद्धार्थ था और माता त्रिशाला थीं। भगवान महावीर का मूल नाम वर्धमान था। उन्होंने 30 वर्ष की आयु में राज-पाट त्याग दिया और 12 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। भगवान महावीर ने अहिंसा को बड़ा धर्म बताते हुए सत्य बोलना और ईमानदारी से जीवन जीना, जरूरत से ज्यादा संग्रह न करना, सभी जीवों के प्रति करुणा रखना जैसे संदेश देकर मानवता की रक्षा की। उन्होने कहा कि जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर के विचार और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। आज के दिन उनके उपदेशों को जीवन में उतारने का संकल्प लेना चाहिए।



