
बिहार में उद्योग को नहीं मिल रहा सरकारी सहयोग, बंद हो रही एथनाल फैक्ट्री: पूर्व मंत्री
मधुबनी- 28 मार्च। पूर्व उद्योग मंत्री व पूर्व नगर विधायक समीर कुमार महासेठ ने कहा कि बिहार में उद्योग इकाइयों को सरकार का आर्थिक सहयोग नहीं मिल रहा है। जिससे उद्योग-धंधा शुरू होने के एक-दो साल में दम तोड़ देता है। उद्योग शुरु करने वाले कंगाल होने के कगार पर पहुंच जाते हैं। इससे देश-दुनिया के उद्योगपतियों में बिहार की छवि खराब होती है। देश-दुनिया के उद्योगपतियों बिहार आना नहीं चाहते है। पूर्व मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार पहले उद्योगपतियों को उद्योग लगाने के लिए बिहार बुलाती है।
उद्योगपति लाखों, करोड़ों लगाकर उद्योग की शुरुआत करते है। इसके बाद सरकार की तय पॉलिसी के तहत उद्योग इकाई को दिए जाते वाला सब्सिडी, कर्मियों का पीएफ, ग्रेचयूटी राशि का समय पर भुगतान नहीं करती है। फिलहाल भागलपुर सहित बिहार के अन्य एथनाल उत्पादन इकाईयों की हालत खराब है।
उद्योग इकाइयों को सब्सिडी, पीएफ भुगतान में सरकार की उदासीनता के बाद इससे जुड़े विभागों की अफसरशाही बडा संकट बना है। विभागीय अफसरशाही को दूर करने में सरकार बौना साबित हो रहा है। बड़े अधिकारी सरकार के अधिकांश आदेश, निर्देश की उपेक्षा करते है। सरकार बिहार की बजाय गुजरात में उद्योग इकाई बढ़ने पर जोर दे रही है। ताकि बिहार के लोग 10-12 हजार रुपये के लिए गुजरात के कारखाना में काम कर सके। बिहार से गुजरात और अन्य राज्यों में बिहार के लोग काम के लिए नहीं जाए तो वहां के उद्योग धंधा बंद पड जाएगा। इसलिए सरकार बिहार में उद्योग धंधा को बढ़ावा कम दे रही है।



