भारत

देश के तीनों सेनाओं के साथ आने पर ही चुनौतियों का मुकाबला करने में सक्षम होगा भारत: राजनाथ

नई दिल्ली- 30 सितंबर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि मां दुर्गा इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण हैं कि जब चुनौतियां बड़ी और असाधारण होती हैं, तो एकीकृत शक्ति अजेय हो जाती है। हमारी तीनों सेनाएं ऑपरेशनल तत्परता की दिशा में काम कर रही है, लेकिन हमारा अगला कदम अखिल भारतीय स्तर पर तीनों सेनाओं के लॉजिस्टिक्स एकीकरण पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब ​​हमारी तीनों सेनाएं एक साथ आएंगी और एक साथ बढ़ेंगी, तभी हम चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर पाएंगे।

नई दिल्ली में आज तीनों सेनाओं के सेमिनार को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारी सेनाएं न सिर्फ दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सेना में गिनी जाती हैं, बल्कि उनके मूल्य और उनका दृष्टिकोण भी पूरी दुनिया में कायम हैं। हमारी हर सेना की अपनी गौरवशाली परंपरा रही है, अपनी पहचान रही है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर एक उदाहरण है कि जब हमारी सेनाएं एक साथ काम करती हैं, तो यह ताकत को कई गुना बढ़ा देती हैं और जीत सुनिश्चित करती हैं। ​हम दूसरे देशों की सर्वोत्तम प्रथाओं से सीख सकते हैं, लेकिन प्रत्येक देश की अपनी विशिष्ट परिस्थितियां होती हैं। हम एक ऐसी प्रणाली बना सकते हैं, जो आधुनिक, सक्षम और हर सेवा के लिए उपयोगी हो।

राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने अपनी हवाई रक्षा में संयुक्तता का जबरदस्त प्रदर्शन किया, जो निर्णायक साबित हुआ। भारतीय वायु सेना की एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली को भारतीय सेना के आकाश तीर और भारतीय नौसेना के त्रिगुण के साथ सहजता से एकीकृत करना ही इस ऑपरेशन की कामयाबी का मूल आधार था। इन प्रणालियों में त्रि-सेवा तालमेल है, जिससे कमांडरों को तुरंत सही समय में और सही फैसले लेने की ताकत मिल गई। यह ऑपरेशन इस बात का प्रमाण है कि जब हमारी सेना मिलकर काम करती है, तो उनकी संयुक्त ताकत में वृद्धि होती है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में सुरक्षा का स्वरूप काफी बदल गया है। धमकियां पहले से कहीं अधिक जटिल हो गई हैं। आज भूमि, समुद्र, वायु,अंतरिक्ष और साइबरस्पेस, ये सभी डोमेन गहराई से जुड़े हुए हैं। निश्चित रूप से हमारी हर सेना के पास अकेले ही किसी भी चुनौती का सामना करने की क्षमता है, लेकिन आज के दौर में हमें निरंतर संवाद की आवश्यकता होगी। ऐसे में नेतृत्व की भूमिका प्रमुख है। उसे हर कदम पर स्पष्ट करना होगा कि यह सुधार क्यों आवश्यक है। जब प्रत्येक सेवा और प्रत्येक कर्मचारी एकजुटता के महत्व को समझेंगे,तभी यह सफल होगा। आज के एकीकृत संचालन के युग में महत्वपूर्ण है कि ये प्रणालियां आपस में निर्बाध रूप से जुड़ी रहें। अलग-थलग रहकर काम करना निर्णय लेने में एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।

तीनों सेनाओं के सेमिनार को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज हम साइबर हमलों और सूचना युद्ध के खतरे का सामना कर रहे हैं, इसलिए हमें इनके लिए मानक तय करने होंगे। जब हम मानकीकरण की बात करते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि सशस्त्र बल अपनी पहचान खो देंगे। हमें एक ऐसी प्रणाली विकसित करनी होगी, जो तीनों सेनाओं के काम में समन्वय स्थापित करे। मुझे विश्वास है कि हम इस पर चर्चा करेंगे। रक्षा मंत्रालय हर संभव सहायता प्रदान करेगा। अगर हमारी सेना के साइबर डिफेंस सिस्टम अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग-अलग मानकों पर काम करेंगे, तो उनके बीच एक अंतर पैदा हो जाएगा। इसलिए हमें साइबर और सूचना युद्ध के मानकों को भी एकीकृत करना होगा।

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