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आईसीएआर ने अन्नदाताओं को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई: रेखा गुप्ता

नई दिल्ली- 01 अप्रैल। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने देश के अन्नदाताओं को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है। इस संस्थान ने खेतों को प्रयोगशालाओं से जोड़ते हुए हरित क्रांति से लेकर आधुनिक तकनीकों तक भारत की खेती को नई दिशा दी है और खाद्य सुरक्षा व आत्मनिर्भरता को मजबूत किया है।

मुख्यमंत्री गुप्ता ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान परिसर में आयोजित 122वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। उन्होंने इस अवसर पर देश के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी विशेषज्ञों को नमन करते हुए संस्थान को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘खाद्यान्न, पोषण और आजीविका सुरक्षा के लिए उन्नत फसल किस्में’ और ‘प्रिसिशन फ्लोरिकल्चर व लैंडस्केप डिजाइन’ पर आधारित पुस्तकों का विमोचन भी किया। इस अवसर पर दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सचिव एवं महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट उपस्थित रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने संस्थान में लगी प्रदर्शनी का दौरा किया। उन्होंने नई कृषि तकनीकों, शोध आधारित नवाचार और आधुनिक खेती के मॉडलों को देखा, वैज्ञानिकों से बातचीत की।

मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताते हुए अधिक वृक्षारोपण, वर्टिकल गार्डनिंग, जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन करने पर जोर दिया। उन्होंने नागरिकों, संस्थानों और समुदायों से सक्रिय भागीदारी की अपील की। साथ ही पीपल, नीम, बरगद और आम जैसे देशी वृक्षों को प्राथमिकता देने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने पहली बार रिज क्षेत्र के लगभग 4200 हेक्टेयर को अधिसूचित कर हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में अहम कदम उठाया है और आईएआरआई से मिट्टी की उर्वरता, शहरी हरियाली एवं वैज्ञानिक पौधरोपण के लिए सहयोग मांगा है। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों से जल स्तर सुधार, कृषि विकास और शहरी खेती को बढ़ावा देने में योगदान देने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार किसानों, कृषि अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। भविष्य में भी इस दिशा में निरंतर कार्य करती रहेगी ताकि देश के अन्नदाताओं को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।

इस अवसर पर दिल्ली के कैबिनेट मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह ने कहा कि दिल्ली के पारंपरिक जल स्रोत जैसे पहले जिन जोहड़ और तालाबों के रूप में जाने जाते थे और आज ‘वॉटर बॉडीज’ कहलाते हैं उनका संरक्षण और पुनर्जीवन बेहद जरूरी है। इससे दिल्ली के जल स्तर और पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा। पिछले कुछ वर्षों में रासायनिक उर्वरकों के अधिक इस्तेमाल से पर्यावरण और स्वास्थ्य पर असर पड़ा है, लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में किसान तेजी से जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। दिल्ली के किसान भी ऑर्गेनिक खेती अपना रहे हैं, जो एक अच्छा संकेत है।

उन्होंने यह भी कहा कि ऑर्गेनिक उत्पादों को सही कीमत मिलनी चाहिए ताकि किसानों को प्रोत्साहन और आर्थिक मजबूती मिल सके। ‘हरित दिल्ली’ के लक्ष्य के तहत मुख्यमंत्री द्वारा उठाए जा रहे कदमों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इससे किसानों और पर्यावरण दोनों को फायदा होगा। उन्होंने बताया कि शहरीकरण बढ़ने के बावजूद दिल्ली में करीब 50 हजार हेक्टेयर जमीन पर अब भी खेती हो रही है और किसानों का योगदान बेहद अहम है। सरकार लगातार किसानों का समर्थन कर रही है, जिससे वे नई तकनीक और टिकाऊ खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि मिलकर प्रयास करने से दिल्ली को स्वच्छ, हरित और स्वस्थ बनाया जा सकता है।

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