
देवी दुर्गा ने राक्षसों का वध कर देवताओं को रक्षा प्रदान की : ऋषिनाथ
मधुबनी- 17 मार्च। श्रीमद् देवी भागवत पुराण में माता दुर्गा को सर्वोच्च शक्ति, ब्रह्मांड की रचयिता और आदिशक्ति माना गया है। वे निर्गुण (निराकार) से सगुण (साकार) बनीं, जो सात्विक, राजसी और तामसी शक्तियों का मूल हैं। श्रीमद देवी भागवत में माता दुर्गा की महिमा की चर्चा करते पं. ऋषिनाथ झा ने बताया कि माता दुर्गा दुष्टों का नाश और भक्तों की दैहिक, दैविक, भौतिक तापों से रक्षा करती हैं।सर्वोच्च शक्ति: दुर्गा जी ही परम शक्ति हैं, जिनसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश प्रकट होते हैं। ब्रह्मांड का पोषण करती है। समस्त अस्तित्व का स्रोत हैं।
माता ज्ञान, इच्छा औरट क्रिया की शक्ति हैं। सात्विक, राजसी और तामसी रूपों में वे ही जगत का संचालन करती हैं। मां दुर्गा अपने भक्तों के कष्टों को हरती हैं। जो भक्त नवरात्र में उनका ध्यान करते हैं, वे दुखों से मुक्त हो जाते हैं।पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां दुर्गा के नौ रूप हैं। शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। माँ दुर्गा ने महिषासुर, शुंभ-निशुंभ जैसे राक्षसों का वध कर देवताओं को रक्षा प्रदान की। माता प्रकृति की देवी है। उनका हर अंश—मंगल चंडी, लक्ष्मी, सरस्वती—संसार का कल्याण करता है। माता महामाया हैं, अपनी योगमाया से संसार को नियंत्रित करती है। देवी भागवत में दुर्गा को समस्त शक्तियों के केंद्र के रूप में पूजा जाता है। भक्तों को मोक्ष और सांसारिक सुख प्रदान करती हैं।



