
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी होगी: अश्विनी वैष्णव
नई दिल्ली- 26 फ़रवरी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को उनके द्वारा होस्ट किए जाने वाले कंटेंट की जिम्मेदारी लेने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा है कि बच्चों और सभी नागरिकों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करना अब प्लेटफॉर्म्स का दायित्व है।
मंत्री वैष्णव ने गुरुवार को यहां डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) के कॉन्क्लेव में अपने मुख्य वक्तव्य में कहा कि प्लेटफॉर्म्स को “जागने” और समाज की बुनियादी जरूरतों का सम्मान करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट की प्रकृति अब पूरी तरह बदल चुकी है और अब प्लेटफॉर्म्स केवल माध्यम नहीं, बल्कि प्रभावशाली मीडिया संस्थान बन चुके हैं।
उन्होंने कहा, “प्लेटफॉर्म्स को अपने यहां होस्ट किए जा रहे कंटेंट की जिम्मेदारी लेनी ही होगी। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और सभी नागरिकों की सुरक्षा प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी है।”
मंत्री ने आगाह किया कि यदि इन सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया तो प्लेटफॉर्म्स को जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले के समय में प्लेटफॉर्म्स खुद को केवल इंटरमीडियरी बताते थे, लेकिन अब वे व्यापक प्रभाव वाले कंटेंट होस्ट बन चुके हैं।
वैष्णव ने समाज में ‘विश्वास’ को सबसे महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि मानव सभ्यता की समूची संरचना विभिन्न संस्थाओं, जैसे- न्यायपालिका, विधायिका, मीडिया और सामाजिक व्यवस्थाओं पर आधारित विश्वास पर टिकी है, लेकिन डीपफेक, दुष्प्रचार और कृत्रिम रूप से तैयार की गई भ्रामक सामग्रियों ने इस विश्वास को गंभीर चुनौती दी है।
उन्होंने कहा कि किसी प्रतिष्ठित समाचार एंकर या उद्योग जगत के नेता का बिना सहमति एआई-जनित वीडियो बनाकर किसी उत्पाद या निवेश योजना का प्रचार करना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने स्पष्ट किया, “किसी भी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या व्यक्तित्व का उपयोग कर कृत्रिम सामग्री बनाने से पहले उसकी सहमति अनिवार्य होनी चाहिए।”
मंत्री ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी, साइबर अपराध और ऑनलाइन गेमिंग जैसे मामलों में भी प्लेटफॉर्म्स को सक्रिय कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि एल्गोरिद्म के जरिए भ्रामक या अवैध कंटेंट को बढ़ावा देना समाज के लिए घातक है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी उपयोगकर्ता को शिकायत या नुकसान की आशंका है, तो प्लेटफॉर्म्स के पास प्रभावी निवारण तंत्र होना चाहिए। न्यायपालिका और संसदीय समितियां भी इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जता चुकी हैं।
राजस्व साझेदारी के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि कंटेंट तैयार करने वाले रचनाकारों, समाचार संस्थानों, शोधकर्ताओं और अन्य सृजनकर्ताओं को उचित और न्यायसंगत हिस्सा मिलना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्वेच्छा से उचित व्यवस्था नहीं की गई, तो कई देशों की तरह कानूनी रास्ता अपनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप बड़ा बदलाव करें और संस्थाओं में विश्वास को पुनर्स्थापित करने में सहयोग दें।



