
अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण कुकिंग गैस की कमी से महाराष्ट्र में होटलों पर संकट गहराया
मुंबई- 10 मार्च। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। मुंबई में गैस की सप्लाई कम होने की वजह से कई होटल मुश्किल में आ गए हैं। इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (आहार) संगठन के विजय के. शेट्टी के नेतृत्व में मुंबई के होटल मालिकों के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को महाराष्ट्र के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल से मुलाकात की। उन्होंने होटल मालिकों को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से चर्चा करने का आश्वासन दिया है।
विजय के. शेट्टी ने मंत्री छगन भुजबल से मुलाकात के बाद पत्रकारों को बताया कि गैस की कमी की वजह से मुंबई में पहले ही 20 फीसदी होटल बंद हो चुके हैं और अगले कुछ दिनों में 60 परसेंट और भी बंद हो जाएंगे। ईरान में युद्ध की वजह से पैदा हुआ संकट अब हम पर असर डाल रहा है। शेट्टी ने बताया कि व्यावसायिक गैस सिलेंडर पर रोक लगाने के बाद सिलेंडरों की कालाबाजारी बढ़ गई है। शेट्टी ने कहा कि होटल इंडस्ट्री कुकिंग गैस सप्लाई में लगभग 25 परसेंट की थोड़ी कमी झेल सकती है, लेकिन पूरी तरह से रोक से बहुत बुरा असर पड़ रहा है। इससे होटल व्यवसाय और उन पर निर्भर लाखों वर्कर दोनों पर असर पड़ रहा है।
खाद्य और नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री योगेश कदम ने कहा कि हमें होटलों के बंद होने का कोई उदाहरण नहीं मिला है। केंद्र सरकार ने कमर्शियल इस्तेमाल के लिए गैस सिलेंडर के बारे में फैसला लिया है। हालांकि, घरेलू इस्तेमाल को लेकर कोई समस्या नहीं है। अगले कुछ दिनों तक कोई कमी नहीं होगी, क्योंकि खाड़ी में गैस के भंडार हमें सप्लाई कर दिए गए हैं। इसलिए, यह मुद्दा जल्द ही हल हो जाएगा। हम केंद्र सरकार के दिए गए आदेशों का पालन कर रहे हैं। युद्ध जैसी स्थिति बन गई है। मुख्यमंत्री हर चीज़ पर नजऱ रख रहे हैं।
इस बीच, उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के नेता आदित्य ठाकरे ने मांग की कि केंद्र सरकार देश में रसोई गैस सिलेंडर की कमी के बारे में आधिकारिक जानकारी जारी करे। आदित्य ठाकरे ने कहा कि केंद्र सरकार को पूरे देश को ऑफिशियल जानकारी देनी चाहिए कि इस जंग की वजह से आम लोगों को क्या नतीजे और मुश्किलें झेलनी पड़ेंगी।
इस मुद्दे पर बात करते हुए कांग्रेस विधायक सतेज पाटिल ने कहा कि होटल जैसी कमर्शियल जगहों पर कुकिंग गैस पर रोक लगा दी गई है। घरों में गैस की सप्लाई पर भी असर पडऩे की संभावना है। पेट्रोलियम कंपनियों के पास कच्चा माल नहीं है। मिडिल क्लास को अगले 10 दिनों तक इसे झेलना पड़ेगा। सरकार पैनिक की स्थिति को रोकने के लिए सब कुछ ठीक दिखाने की कोशिश कर रही है, लेकिन ज़मीनी हालात अलग हैं।



