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लोकसभा में पेश कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 JPC को भेजा गया

नई दिल्ली- 23 मार्च। लोकसभा में सोमवार को पेश किया गया कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के आग्रह पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेज दिया गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बीते 10 मार्च को उक्त विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी थी।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करते समय लोकसभा को बताया कि इस विधेयक का उद्देश्य लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप अधिनियम, 2008 और कंपनी अधिनियम, 2013 में संशोधन करना है। भागीदारी अधिनियम, 2008 और कंपनी अधिनियम, 2013 में संशोधन करना है।

इससे पहले लोकसभा में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने नियम 72 (1) के तहत विधेयक को पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि यह संवैधानिक सिद्धातों के अनुरूप नहीं है और इसमें बहुत सारी खामियां हैं। तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत रॉय ने आरोप लगाया कि इस विधेयक से सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि सरकार कॉर्पोरेट अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना चाहती है या फिर नियमों को सख्त बनाना चाहती है। द्रमुक की सदस्य टी सुमति ने भी विधेयक पेश किए जाने का विरोध किया।

सीतारमण ने विपक्षी सांसदों की आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि यह विधेयक दो साल के विचार-विमर्श के बाद यहां लाया गया है तथा कॉर्पोरेट विधि समिति में सभी पक्षों को सुना गया है। उन्होंने कहा कि सीएसआर के तहत तीन-चार श्रेणियां हैं और सिर्फ शुद्ध मुनाफे की श्रेणी में बदलाव किया जा रहा है। वित्त मंत्री ने विधेयक को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजने की अनुशंसा की, जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।

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