
मधुबनी में मुख्यमंत्री वृद्धजन आश्रम स्थल का संचालन बंद होने पर बोले मोद नारायण झा, कहा- बुजुर्ग सेवा आश्रम’ के फिर से संचालन की होगी पहल
मधुबनी- 03 अप्रैल। नगर निगम कार्यालय स्थित मुख्यमंत्री वृद्धजन आश्रम स्थल का संचालन बंद होने के बाद जिले के वृद्धजनों के लिए मैथिल विकास प्रतिष्ठान की पहल से उम्मीद की किरण जगी है। इसकी जानकारी देते हुए मैथिल विकास प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष मोद नारायण झा ने बताया कि मधुबनी में एक ऐसा आश्रम की स्थापना की जाएगी जिसमें रहने वाले वृद्धजनों की प्रतिभाओं को सामने लाया जाएगा।उनकी रचनात्मक सोच के अनुरूप जीवन संवार की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। घर जैसा माहौल उपाध्यक्ष कराई जाएगी।उन्होंने बताया कि बुजुर्गों के शारीरिक व मानसिक तनाव को दूर करनै के लिए खेलकूद, थार्मिक, सामाजिक, कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की सेवा मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म और पुण्य कर्म है। बुजुर्ग हमारे परिवार और समाज के अनुभव व ज्ञान के भंडार हैं। उनकी निस्वार्थ सेवा से आशीर्वाद मिलता है, जो जीवन में खुशी,मानसिक शांति और ईश्वर की कृपा दिलाता है। उनके प्रति सम्मान और प्रेम रखना,समाज और परिवार की रीढ़ को मजबूत करता है।
बुजुर्गों की सेवा करना केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि सर्वोच्च धर्म माना जाता है, क्योंकि माता-पिता में ही ईश्वर का निवास होता है। हरेक घरों के बुजुर्ग जीवन के उतार-चढ़ाव से सीखे हुए ज्ञान के स्रोत हैं, जिनकी सलाह भविष्य के लिए बहुमूल्य होती है। उनका आशीर्वाद जीवन की हर मुश्किल को आसान कर सकता है। सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। बुढ़ापे में उन्हें धन से अधिक अपनों के प्यार,सम्मान और समय की आवश्यकता होती है। हम जो सेवा उन्हें देते हैं, वही कल हमारे बच्चों के लिए एक संस्कार और उदाहरण बनती है। बुजुर्गों के साथ बैठने, उनकी बातें सुनें और उनके अनुभव साझा करना चाहिए। उनके स्वास्थ्य का ध्यान, समय पर दवाएं, पौष्टिक भोजन देना चाहिए। उनके विचारों का आदर, प्रेमपूर्ण व्यवहार अतनाना चाहिए। उन्हें अकेलापन महसूस न होने देना चाहिए। बुजुर्गों की सेवा करना हमें मानवता की सीख देता है और हमारे जीवन को सार्थक बनाता है।



