
पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों में कांस्य थाली थेरेपी शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालता बाहर
मधुबनी- 09 अप्रैल। पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों में कांस्य थाली थेरेपी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। कांस्य थाली थेरेपी के फापदे पर चर्चा करते हुए अंबिका कांस्य थाली थेरेपी सेंटर के विशेषज्ञ राहुल कुमार झा ने बताया कि कांस्य थाली थेरेपी पैरों के तलवों की एक पारंपरिक आयुर्वेदिक मालिश है। यह थेरेपी गहरी नींद लाने, तनाव कम करने, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने और शरीर से विषाक्त पदार्थ (टॉक्सिन) निकालने में मदद करती है। यह वात-पित्त-कफ को संतुलित करती है। जोड़ों के दर्द में राहत देती है। उन्होंने बताया कि कांस्य थाली थेरेपी से आंखों की थकान व सूजन को कम करने में विशेष रूप से मदद मिलती है। जिससे आंखों की रोशनी में सुधार हो सकता है। यह नर्वस सिस्टम को शांत करती है। जिससे अनिद्रा की समस्या दूर होती है। यह घुटने, एड़ी और पैरों के दर्द को कम करती है।
ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करती है। पैरों की सूजन और दिनभर की थकावट को कम करने में बहुत प्रभावी है। यह एड़ियों को मुलायम बनाने में भी मदद करती है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में पैरों की देखभाल को बहुत महत्व दिया जाता है। पैरों को संपूर्ण स्वास्थ्य और ऊर्जा संतुलन का द्वार माना जाता है। अनूठी चिकित्सा पद्धतियों में से एक कांस्य थाली फुट मसाज है। यह एक प्राचीन उपचार कला है।यह शरीर से विषाक्त पदार्थों और अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालता है।



