बिहार

BJP विधायक कुंदन कुमार ने राज्यसभा सांसद के खिलाफ खोला मोर्चा

बेगूसराय- 20 फरवरी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मीडिया सेल के बिहार प्रदेश संयोजक एवं विधायक कुंदन कुमार ने राज्यसभा सदस्य प्रो. राकेश सिन्हा पर बेगूसराय के लोगों के साथ इमोशनल कार्ड खेलने का आरोप लगाया है।

रविवार को बेगूसराय स्थित अपने कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में कुंदन कुमार ने कहा कि गंगा नदी पर प्रस्तावित शाम्हो-मटिहानी पुल लेकर मैंने सही बातें कही थी, लेकिन राकेश सिन्हा श्रेय लेने के साथ-साथ अपनी हत्या और घर जलावाने का इमोशनल कार्ड बेगूसराय के लोगों के साथ खेलने लगे। राकेश सिन्हा ने इमोशनल कार्ड खेलकर बेगूसराय की जनता को अपराधी, हत्यारी एवं अज्ञानी साबित करने की कोशिश की, उससे स्पष्ट होता है कि बेगूसराय की जनता उनकी नजर में हत्यारी है, वह बेगूसराय की जनता को इतने अज्ञानी एवं अपराधी प्रवृत्ति के क्यों मानते हैं।

कुंदन कुमार ने कहा कि मुझे उनकी चुनौती स्वीकार है, मैं कंकड़ उस पहाड़ से टकराने के लिए तैयार हूं। श्रेय हम क्यों लेंगे, वो पढ़े लिखे बड़े लोग लेंगे, जिन्हें लोकसभा चुनाव लड़ना है। बतौर जनप्रतिनिधि मुझे क्षेत्र के समग्र विकास में अपनी भूमिका का निर्वाह करने के लिए किसी से प्रशस्ति पत्र प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है। केंद्र सरकार जिस विकास के बहुआयामी परियोजना को बेगूसराय जिले में क्रियान्वित करना चाहती है, उस दिशा में जो सबसे सुगम और उपयोगी सार्थक कदम होंगे, मैं उसमें निरंतर कदमताल करने के लिए तैयार हूं। सरकार द्वारा जिलाधिकारी के माध्यम से सुझाव मांगे गए थे, मैंने उसमें खातोपुर से पुल निर्माण की बात कही एवं शाम्हो के लोगों के मुख्यालय से सीधा संपर्क में यह उचित भी है। वहां के लोगों ने मिलकर और लिखकर हमसे यह मांग की थी। लेकिन शाम्हो में आयोजित जनसभा में एलाइनमेंट की बातों को अफवाह साबित करने की कोशिश की गई। बेगूसराय की जनता राकेश सिन्हा से जवाब का इंतजार कर रही है कि यदि एलाइनमेंट की बातें अफवाह थी तो विगत 12 फरवरी को जिलाधिकारी के कार्यालय में किस प्रकार की

बैठक आयोजित की गई एवं उस बैठक के क्या मुद्दे थे। पूरे बेगूसराय की जनता या जानती है कि एलाइनमेंट के मुद्दे को अपना बताकर आखिर किस साजिश को छुपाने की कोशिश की जा रही थी। उन्हें बताना चाहिए कि 2020 में डीपीआर क्यों बदला गया। जनसभा के माध्यम से उन्होंने कहा कि मैंने डीपीआर नहीं बदलवाया है तो वह आखिर इस अपराध बोध में क्यों जी रहे हैं एवं डीपीआर को बदलवाने की बात पर स्पष्टीकरण आखिर उन्हें क्यों देना पड़ रहा है। जनप्रतिनिधि को इस प्रकार से खुले मंच से गालियां दी गई, क्या वह नैतिकता के आधार पर अनुचित नहीं है।

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