
BIHAR:- शराबबंदी कानून में नीतीश कैबिनेट का संशोधन
पटना- 08 मार्च। सीएम नीतीश कुमार की अध्यक्षता में देर शाम कैबिनेट की बैठक में शराबबंदी कानून में संशोधन का प्रस्ताव मंजूर किया गया है। इस संशोधन के तहत राज्य में शराब की बिक्री संगठित अपराध की श्रेणी में रहेगा। तथा शराब की बिक्री व तस्करी में लगे लोगों की संपत्ति जब्त की जाएगी।
कैबिनेट की बैठक में संशोधन के बाद ऐसा कोई भी पदार्थ,जिसे शराब में बदला जा सके मादक द्रव्य की श्रेणी में आएगा। इसके अलावा शराब मामलों का अब ट्रायल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, डिप्टी कलेक्टर या इससे ऊपर के रैंक के अधिकारी कर सकते हैं और शराब मिलने वाले स्थल को अब एएसआई भी सील कर सकेंगे। कैबिनेट में यह भी निर्णय लिया गया है कि तीन माह की सजा को घटाकर एक माह की जायेगी। 50 हजार जुर्माने की राशि नोटिफिकेशन में तय होगी। हालांकि सरकार की ओर से इस संशोधन के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी। सरकार ने कहा कि विधानसभा और विधान परिषद में इस संशोधन को रख कर पूरी जानकारी दी जायेगी।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले नीतीश कुमार विधानसभा में ये कह चुके हैं कि वे शराबबंदी कानून को और सख्त करने जा रहे हैं। नीतीश ने पांच दिन पहले ही सदन में कहा था कि वे शराब पीने और बेचने वालों को छोड़ेंगे नहीं। अभी तो ड्रोन से शराब को पकड़ा जा रहा है, अब वे प्लेन उड़वाकर भी शराब पकड़वायेंगे। इस बीच शराब पकड़ने के लिए मोटर बोट खरीदने का सरकारी एलान भी सामने आ गया है।
सुप्रीम कोर्ट शराबबंदी कानून के कारण बिहार में कोर्ट-कचहरी का कामकाज बुरी तरह प्रभावित होने से भारी नाराज है। कोर्ट ने पिछले महीने ही बिहार में शराबबंदी कानून पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा था। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पहले ही खुले मंच से कह चुके हैं कि बिहार सरकार ने बिना किसी प्लानिंग के शराबबंदी कानून लागू कर दिया,जिससे पूरी न्यायिक व्यवस्था चरमरा गयी है। हाई कोर्ट का आलम यह है कि जमानत के एक सामान्य मामले की सुनवाई होने में एक साल लग रहा है। हाई कोर्ट के 16 जज शराब से जुड़े मामले की ही सुनवाई कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच के समक्ष शराबबंदी कानून पर सुनवाई आज ही होनी थी। लेकिन राज्य सरकार ने कोर्ट में अर्जी देकर मामले को तीन हफ्ते के लिए टलवा लिया है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जवाब देने के लिए तीन हफ्ते का समय मांग लिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि अप्रैल के पहले सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट की बेंच में इस मामले की सुनवाई होगी। चर्चा ये हो रही है कि कोर्ट में होने वाली फजीहत से बचने के लिए सरकार ने पहले ही कानून में संशोधन कर दिया है।



