बिहार

बिहार ज्ञान और लोकतांत्रिक परंपराओं की पवित्र धरती: किरन रिजिजू

पटना- 07 फरवरी। बिहार विधानसभा भवन के स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने बिहार की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और लोकतांत्रिक विरासत को रेखांकित किया। समारोह में मौजूद अन्य वक्ताओं ने बिहार की लोकतांत्रिक परंपराओं, तकनीकी प्रगति और विधायी सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किरन रिजिजू ने कहा कि बिहार ज्ञान, विचार और लोकतांत्रिक चेतना की पवित्र भूमि है। भगवान बुद्ध ने इसी धरती से पूरी दुनिया को शांति और करुणा का संदेश दिया, जिससे बिहार का वैश्विक महत्व और भी बढ़ जाता है।

रिजिजू ने कहा कि बिहार की पवित्र धरती से उनका गहरा लगाव है। बौद्ध धर्म का संदेश यहीं से पूरे विश्व में फैला। उन्होंने कहा, “जब मैं भगवान बुद्ध के अवशेष लेकर विदेश जाता हूं, तो लोगों का मेरे प्रति नजरिया श्रद्धा और पवित्रता से भर जाता है।”

उन्होंने प्रधानमंत्री की “वन नेशन, वन एप्लिकेशन” की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल युग में शासन और लोकतंत्र दोनों तेजी से बदल रहे हैं। भारत जैसे विशाल देश में जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियां अत्यधिक हैं। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि भारत में एक लोकसभा क्षेत्र में लगभग 25 लाख लोग होते हैं, जबकि ब्रिटेन में एक संसदीय क्षेत्र में औसतन 90 हजार लोग होते हैं। ऐसे में भारतीय जनप्रतिनिधियों के सामने चुनौतियां कहीं अधिक हैं।

किरन रिजिजू ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का मूल दायित्व अपने क्षेत्र के लोगों की सेवा करना है। बदलते समय में तकनीक का महत्व बढ़ गया है। उन्होंने कहा, “आज यदि किसी विषय पर बोलना हो या भाषण देना हो, तो एआई के माध्यम से कुछ ही सेकंड में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसका जितना अधिक उपयोग करेंगे, उतना ही लाभ मिलेगा।” उन्होंने परिश्रम, लगन और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति को एक सफल सांसद और विधायक की पहचान बताया।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने बिहार विधानसभा की कार्यवाही की सराहना करते हुए कहा कि यहां की बहसें उच्च स्तर की होती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण (लाइव) प्रभावी है और यहां की कार्यशैली सार्थक होने के साथ-साथ प्रेरणादायक भी है।

इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में बिहार विकास की नई इबारत लिख रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में जहां राज्य का बजट 29 हजार करोड़ रुपये था, वह आज बढ़कर लगभग 3.47 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा और विधानसभा दोनों का डिजिटलीकरण किया गया है तथा बिहार विधानसभा में डिजिटल लाइब्रेरी की आधारशिला रखी गई है, जो ज्ञान-संसाधनों को सुलभ बनाएगी।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने इस अवसर पर कहा कि विधानसभा केवल एक भवन नहीं, बल्कि बिहार की लोकतांत्रिक चेतना का प्रतीक है। इसकी विशिष्ट पहचान है और वर्तमान चुनौतियों पर मंथन करते हुए लोकतंत्र को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

वहीं, विजय चौधरी ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस कार्यक्रम में शामिल होना था, लेकिन पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण वे उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने मुख्यमंत्री की ओर से सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

समारोह में कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान बिहार की लोकतांत्रिक परंपराओं, तकनीकी प्रगति और विधायी सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया गया।

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