
BIHAR: सदन में विपक्ष के हंगामे के बाद मुजफ्फरपुर आंख संक्रमण मामले में FIR दर्ज
पटना/मुजफ्फरपुर-02 दिसंबर। मुजफ्फरपुर के जुरन छपरा स्थित आई हॉस्पिटल को लोग अब ‘आंखफोड़वा’ अस्पताल भी कहने लगे हैं। हालांकि इस मामले में सीएस ने ब्रह्मपुरा थाने में अस्पताल के प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी है।
इस अस्पताल की लापरवाही की वजह से 25 से अधिक मरीजों के आंखों की रोशनी चली गयी है। यही नहीं,15 से अधिक मरीजों को इन्फेक्शन बढ़ने की वजह से अपनी आंखें तक निकलवानी पड़ी हैं। गुरुवार को भी कुछ मरीजों के आंखों को निकालने के लिए ऑपरेशन किया जाना था, परंतु इससे पहले इस आई हॉस्पिटल का गेट बंद कर दिया गया और बाहर नोटिस लगा दी गई कि फिलहाल सभी ऑपरेशन बंद हैं। वहीं, कई मरीज हॉस्पिटल के बाहर अपनी आंखों के ऑपरेशन के लिए कतार में लग कर इंतजार कर रहे हैं।

इस मामले में सिविल सार्जन ने आई हॉस्पिटल के प्रबंधक ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक एवं अस्पताल में कार्यरत कर्मियों के खिलाफ शहर के भ्रह्मपुरा थाने में गुरुवार शाम प्राथमिकी दर्ज करायी है। सीएस डॉ विनय शर्मा ने इस बाबत हि.स. से बातचीत में बताया कि अस्पताल प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। साथ ही जांच जो की गई थी उसकी रिपोर्ट भी थाना को दे दी गई है, किन लोगों ने ऑपरेशन किया साथ ही कौन डॉक्टर इसमें शामिल थे सब भेज दिया गया है। बीते सोमवार को मरीजों के परिजनों ने अपने प्रियजनों की आंखों की रोशनी जाने के बाद अस्पताल में अपने गुस्से का इजहार किया था और प्रबंधन को खूब खरी-खोटी सुनाई थी।इस आई हॉस्पिटल में करीब 65 लोगों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ था, जिसमें 24 से अधिक लोगों की आंखों की रोशनी चली गयी। वहीं, इन्फेक्शन की वजह से अब तक 15 लोगों का ऑपरेशन कर उनकी आंखें निकाली जा चुकी हैं।11 मरीजों की आंख एसकेएमसीएच में ऑपरेशन कर बाहर निकाली गयी है, वहीं चार मरीजों का ऑपरेशन जुरन छपरा स्थित आई हॉस्पिटल ने किया है।
गुरुवार को भी कई मरीज ऑपरेशन के लिए आई हॉस्पिटल के बाहर इंतजार करते रहे, लेकिन यहां के प्रबंधन ने एक बार फिर लापरवाही दिखाते हुए हॉस्पिटल का गेट बंद कर दिया है।शुक्रवार को भी एसकेएमसीएच में भर्ती तीन मरीजों का ऑपरेशन कर उनकी आंख बाहर निकाली जाएगी। इस पूरे मामले की गूंज अब सड़क से सदन तक पहुंच चुकी है। सदन में विपक्ष लगातार इस बड़े मामले को लेकर राज्य सरकार पर हमलावर है।
पूर्व सीएम राबड़ी देवी एवं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस लापरवाही के लिए पूरी तरह से राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, इस मामले में मानवाधिकार आयोग ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है। बिहार मानवाधिकार आयोग के वकील एसके झा ने इस मामले को लेकर एक याचिका डाली थी, जिसके बाद अब मानवाधिकार आयोग ने सरकार से जवाब मांगा है। मानवाधिकार आयोग की ओर से बिहार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा गया है।
पूरे घटना को लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय का कहना है कि स्पेशल टीम पूरे मामले की जांच कर रही है। आई हॉस्पिटल के ओटी मशीन का स्वाब लिया गया है। वहीं, दूसरे पहलुओं पर भी जांच की जा रही है। जल्द ही पूरे मामले की रिपोर्ट आ जाएगी।



