
BIHAR:- बक्सर में जमीन के मुआवजे को लेकर उग्र किसानों ने किया आगजनी व तोडफोड़, केस दर्ज, 3 गिरफ्तार
पटना- 11 जनवरी। बिहार के बक्सर जिले में केंद्र और हिमाचल सरकार के संयुक्त थर्मल पावर प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर किसानों का प्रदर्शन बुधवार को अचानक से उग्र हो गया। ग्रामीणों ने बुधवार सुबह लाठी-डंडे लेकर पुलिस और पावर प्लांट पर हमला कर दिया और पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ कर उनमें आग लगा दी।
पुलिस मुख्यालय पटना की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार 10 जनवरी को बक्सर के मुफस्सिल थानान्तर्गत चौसा में निर्माणाधीन एसजेवीएन थर्मल पॉवर प्लांट के लिए किसानों की भूमि को अधिगृहीत की गई थी। पूर्व निर्धारित मुआवजे के स्थान पर नये दर से मुआवजे की भुगतान की मांग को लेकर बुधवार को दो सौ से अधिक किसानों ने पॉवर प्लांट के मुख्य द्वार पर जमकर हंगामा किया। इस दौरान चौसा अंचलाधिकारी के साथ उनकी झड़प हुई और उनपर जानलेवा हमला भी किया गया।
चौसा अंचलाधिकारी ने सरकारी कार्य में बाधा डालने और जानलेवा हमला की शिकायत मुफस्सिल थाने में दी। जिसमें 24 नामजद और 250 से 300 अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया। जिसके बाद आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए लिए छापेमारी की गयी। इस दौरान आरोपियों के परिजनों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। बाद में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया।
इनकी गिरफ्तारी के बाद बुधवार को सुबह 9:30 बजे बड़ी संख्या में स्थानीय किसान पॉवर प्लांट के मुख्य गेट पर एकत्र होकर प्रदर्शन करने लगे। अचानक प्रदर्शनकारी किसानों की भीड़ में शामिल असामाजिक तत्वों ने पॉवर प्लांट के मुख्य द्वार को तोड़कर परिसर में घुस गए और तोड़फोड़ व आगजनी करने लगे। पुलिस ने हंगामा कर रहे लोगों को नियंत्रित करने का प्रयास किया लेकिन उत्तेजित भीड़ ने पुलिस के दो वाहनों, कम्पनी के जेसीबी सहित 16 वाहनों को आग लगाकर क्षतिग्रस्त कर दिया। भीड़ के हमले में गृहरक्षकों सहित 10 पुलिसकर्मी जख्मी हो गये। किसानों ने कुछ देर के लिए बक्सर कोचस मुख्य मार्ग को भी बाधित कर दिया गया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। घटनास्थल पर पुलिस उप महानिरीक्षक, शाहाबाद क्षेत्र जिलाधिकारी और बक्सर एसपी कैम्प कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला—
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 1320 मेगावाट के इस प्लांट की आधारशिला 9 मार्च 2019 को रखी थी। इसे केंद्र और हिमाचल प्रदेश सरकार की संयुक्त स्वामित्व वाली सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) बना रही है। अभी तक 75 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। बीते 85 दिन से किसान मुआवजा बढ़ाने के लिए यहां शांतिपूर्वक धरना दे रहे हैं। किसान बगैर मुआवजा मिले फसल लगे खेतों में रेल कॉरिडोर और पाइपलाइन बिछाने के कार्य का विरोध कर रहे थे। जिसे लेकर चौसा मौजा में किसान विरोध कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें मुआवजा नहीं दिया जा रहा है और जबरन उनकी भूमि पर कब्जा कर प्रोजेक्ट को शुरु कर दिया गया है। ये विवाद पिछले दो दिनों में ज्यादा बढ़ गया और मंगलवार को पुलिस ने भारी पुलिस बल के साथ चौसा मौजा में पहुंचे और किसानों को उनकी जमीन से खदेड़ दिया और वाटर पाइपलाइन का काम शुरु करवा दिया। किसानों का कहना है कि वो भूमि अर्जन कानून 2013 की तरह उचित मांगों को लेकर 17 अक्टूबर से शांति पूर्ण तरीके से धरना दे रहे थे। जबकि पुलिस ने उनके साथ जबरदस्ती मारपीट एफआइआर कर परेशान कर रही है।
9,828 मिलियन यूनिट का होगा उत्पादन—
इस प्लांट से 9,828 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन होगा। करार के अनुसार संयंत्र से उत्पादित बिजली का 85 प्रतिशत बिहार को दिया जाएगा। इस प्लांट के लिए जिला भू-अर्जन कार्यालय के अनुसार चौसा क्षेत्र के चौदह गांवों के मौजे के 137.0077 एकड़ जमीन पर रेल कॉरिडोर बनना है। इसके लिए 55.445 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की जाएगी। इसमें कई गांव के मौजे के तहत कुल 309 किसानों की भूमि की अधिसूचना निकाली गई है।इन गांवों की जमीन अधिग्रहण में- बनारपुर,सलारपुर,महुवारी, हुसैनपुर,कठघरवा,खेमराजपुर,चौसा,न्यायीपुर,धर्मागतपुर, महादेवा,माधोपुर,अखौरीपुर गोला,बघेलवा, बेचनपुरवा और मोहनपुरवा।



