
BIHAR:- करोड़ी समाज का चलता है अपना कोर्ट, सुनाया जाता फैसला
मधुबनी-18 अप्रैल। बिहार के मधुबनी जिला के जयनगर प्रखंड के देवधा गांव में घुमंतू खानाबदोश कुररियाड़ करोड़ी जाति का महासम्मेलन 25 अप्रैल तक चलेगा। बिहार के करीब 19 जिलों में सीमांचल,मिथिलांचल से करीब पचीस हजार की संख्या में करोड़ी जाति के लोग शामिल होगें। पिछले 12 अप्रैल से जारी महासम्मेलन में करोड़ी जाति के उपर अत्याचार, जाति के उन्नति और विकास एवं सरकार से स्थायी रूप से बसाने की मांग को लेकर महासम्मेलन का आयोजन किया गया है। घुमंतू खानाबदोश कुररियाड़ करोड़ी महासंघ गोवर्धन अदालत कासमा मिरदाहा के अध्यक्ष कमल करोड़ी ने बताया कि करोड़ी जाति के उत्थान एवं सरकारी लाभ के लिए विगत कई वर्षों से हम लोग संघर्ष कर सरकार के समक्ष अपनी मांगों को रख चुके हैं। परंतू सरकार ने करोड़ी जाति के लिए अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर सकी है। प्रत्येक वर्ष जयनगर रेलवे स्टेशन के मालगोदाम पर पूर्णिमा के बाद अपनी जाति के लोगों के साथ सम्मेलन व पंचायत कर सरकार तक अपनी आवाज को पहुंचाने का काम किया। लेकिन हमारे आवाज पर सरकार दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। सरकार हमारी मांगों को पूरा नहीं करती है,तो करोड़ी जाति अपने हक के लिए सड़क पर उतर सकती है।
कमल करोड़ी ने कहा कि इस महासम्मेलन में हमारे समाज का उप जाति कंजर, लाखौर, बनवरिया,कर्नाटकी,जारकुटवा, एवं नट के प्रतिनिधि परिवार भी शामिल होगें। सभा के माध्यम से हमारे समाज के अनेकों समस्याओं को सरकार तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि करोड़ी जाति आजादी के 73 वर्ष बाद भी जंगली जीवन यापन करने पर मजबूर हैं।
खानाबदोश की जिंदगी जी रहे हैं। आज के समय में भीख मांगने वाले मजदूरी काम कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। लेकिन करोड़ी जाति के लिए कोई सोंचने वाला नहीं है। अध्यक्ष ने कहा कि सरकार से हम मांग करतें हैं कि हमारे समाज को स्थानीय आवास योजना का लाभ मुहैया कराई जाऐ। ताकि करोड़ी जाति भी समाज के अन्य लोगों की तरह जीवन यापन कर सकें। सरकार एक तरफ सर्व शिक्षा अभियान के तहत बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रही है। लेकिन करोड़ी जाति जाति के बच्चे आज भी शिक्षा से वंचित हैं। कहीं न कहीं सरकार की दोहरी नीति का खेल चल रहा है। उद्यमी को उद्योग के लिए सरकारी अनुदान मुहैया कराई जाए।
पैतृक व्यवसाई मधुमक्खी पालन एवं शहद निष्कर्षण हेतु उद्योग लघु उद्योग लगाने के लिए अनुदान की समुचित व्यवस्था की जाय। आप को बतादें कि करोड़ी जाति के द्वारा साल में एक बार महापंचायत एवं पांच सालों पर महासम्मेलन का आयोजन किया जाता है। जाति में छोटी से बङी घटना को साल में होने वाले महापंचायत में सुलझाया जाता है। करोड़ी जाति का अपना अदालत होता है। महापंचायत में किए गए फैसले को मानना अनिवार्य होता है। फैसले जो भी सुनाया जाता है,सर्वोपरी फैसला होता। कोर्ट में सभी तरह के समस्याओं का समाधान भी यहीं निकला जाता है।



