
MADHUBANI:- माता-पिता की सेवा से बढ़कर कोई पूजा और धर्म नहीं
मधुबनी- 14 फरवरी। मातृ पितृ पूजन दिवस पर शहर के वार्ड नंबर 30 के लड्डू गोपाल कॉलोनी निवासी अवकाशप्राप्त प्रो. कृष्ण कुमार ठाकुर के आवासीय परिसर में मातृ पितृ पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. कृष्ण कुमार ठाकुर ने कहा कि भारतीय संस्कृति में माता-पिता की सेवा को सर्वोच्च धर्म और ईश्वर भक्ति के समान (देव तुल्य) माना गया है।
जिसे ‘मातृदेवो भव:’ और ‘पितृदेवो भव:’ के माध्यम से सर्वोच्च स्थान दिया गया है। यह परंपरा निस्वार्थ प्रेम, आदर और कृतज्ञता पर आधारित है, जहाँ संतान का कर्तव्य है कि वह बुढ़ापे में माता-पिता की शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक देखभाल करे। विपिन कुमार झा ने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में माता-पिता को देवताओं से भी ऊपर माना गया है, और उनकी सेवा से सभी तीर्थों के दर्शन का फल मिलता है। बचपन से ही बच्चों को माता-पिता का सम्मान करने और उनके बुढ़ापे में सहारा बनने के संस्कार दिए जाते हैं। माता-पिता जीवन भर अथक परिश्रम कर संतान का पालन, पोषण करते हैं, इसलिए वृद्धावस्था में उनकी सेवा करना संतान का नैतिक दायित्व है। माता-पिता की सेवा करने से जीवन में सुख, शांति और सफलता प्राप्त होती है।
उनकी शारीरिक जरूरतों का ध्यान रखना, भावनात्मक रूप से समय देना, उनके अनुभवों का सम्मान करना, और बुढ़ापे में होने वाली मानसिक बेचैनी को समझकर स्नेहपूर्वक उनकी देखभाल करना होता है। माता-पिता की सेवा से बढ़कर कोई अन्य पूजा या धर्म नहीं है, और यह बच्चों के लिए अपने माता-पिता के निस्वार्थ प्रेम को लौटाने का एक माध्यम है। कार्यक्रम में प्रणव कुमार ठाकुर, स्नेहा कुमारी, रेणु देवी, डोली कुमारी, शांति देवी, आकृति झा, सूर्यांश कुमार, साकेत कुमार, हिमांशु कुमार, उत्कर्ष कुमार ठाकुर, रोशनी चौधरी, प्रशांत कुमार ठाकुर सहित अन्य लोगों ने हिस्सा लिया।



