भारत

 देश के चार राज्यों की संवैधानिक कमान पूर्व सैन्य अधिकारियों को सौंपी गई

नई दिल्ली- 12 फरवरी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को देश के राज्यपालों के तबादलों के साथ 4 नए राज्यपालों की भी नियुक्तियां की हैं। यह पहला ऐसा मौका है, जब देश के चार राज्यों की कमान संवैधानिक रूप से पूर्व सैन्य अधिकारियों को सौंपी गई है। महाराष्ट्र के राज्यपाल और केंद्र शासित लद्दाख के उप राज्यपाल के इस्तीफे स्वीकार करने के साथ 13 राज्यों में नए राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं।

अब चार रणनीतिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूर्व सैन्य अधिकारी राज्यपाल और उपराज्यपाल की जिम्मेदारी संभालेंगे। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनाइक अरुणाचल प्रदेश की कमान संभालेंगे। ब्रिगेडियर बीडी मिश्रा केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में उपराज्यपाल का पदभार संभालेंगे। वह अभी तक अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल थे, लेकिन अब उन्हें राधा कृष्ण माथुर की जगह लद्दाख का एलजी नियुक्त किया गया है। लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह उत्तराखंड के राज्यपाल नियुक्त किये गए हैं। इसके अलावा नौसेना से सेवानिवृत्त एडमिरल डीके जोशी को केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का राज्यपाल नामित किया गया है।

लेफ्टिनेंट जनरल के टी पारनाइक—

अरुणाचल प्रदेश के नवनियुक्त राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल के टी पारनाइक भारतीय सेना के सबसे सम्मानित और प्रतिष्ठित जनरलों में से एक रहे हैं, जिनके पास सैन्य क्षेत्रों में 41 वर्ष कार्य करने का अनुभव है। जनरल पारनाइक ने फील्ड ऑपरेशंस और प्रतिष्ठित स्टाफ नियुक्तियों में कई नेतृत्व पदों पर कार्य किया। उन्होंने राजस्थान सेक्टर और जम्मू-कश्मीर में 2 राजपूताना राइफल्स, नियंत्रण रेखा पर ऑपरेशन पराक्रम के दौरान एक इन्फैंट्री ब्रिगेड और सिक्किम में एक माउंटेन डिवीजन की कमान संभाली।

जनरल ऑफिसर ने भूटान में भारतीय सैन्य प्रशिक्षण दल और उत्तर-पूर्व में एक कोर की कमान संभाली। जनरल पारनाइक अत्यधिक सक्रिय उत्तरी कमान के सेना कमांडर भी रहे हैं। इसी कमान के पास चीन और पाकिस्तान के साथ 3,500 किलोमीटर की सबसे संवेदनशील सीमाओं के साथ सैन्य संचालन और रसद से निपटने की जिम्मेदारी है।

ब्रिगेडियर बीडी मिश्रा—

रणनीतिक रूप से अहम लद्दाख में विकास के साथ क्षेत्र की सुरक्षा भी एक अहम मुद्दा है। ऐसे में चीन और पाकिस्तान से दो युद्धों में हिस्सा ले चुके ब्रिगेडियर बीडी मिश्रा को लद्दाख का उपराज्यपाल बनाया गया है, ताकि वह प्रभावी तरीके से काम कर पाएं। 17 दिसंबर, 1961 को एक स्थायी नियमित पैदल सेना अधिकारी के रूप में शुरू हुए करियर के बाद मिश्रा 31 जुलाई, 1995 को भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए। उनका जन्म 20 जुलाई, 1939 को हुआ था।

वह एनएसजी (ब्लैक कैट कमांडो) काउंटर हाईजैक टास्क फोर्स के कमांडर थे, जिसने 24 अप्रैल, 1993 को राजा सांसी एयरफील्ड, अमृतसर में इंडियन एयरलाइंस के अपहृत विमान के बचाव अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। सभी 124 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को बिना किसी हताहत या क्षति के अपहर्ताओं को खत्म करने के बाद ऑपरेशन में बचा लिया गया। इस हाईजैक संकट को समाप्त करने में मिश्रा की भूमिका के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री की सराहना मिली।

लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह—

उत्तराखंड के राज्यपाल नियुक्त किये गए गुरमीत सिंह भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल हैं। वह सेना में लगभग चार दशकों के बाद 31 जनवरी, 2016 को सेवानिवृत्त हुए। वे सेना के उप प्रमुख थे और कश्मीर में नियंत्रण रेखा की रखवाली करने वाली रणनीतिक XV कोर के सहायक जनरल और कोर कमांडर थे। उन्होंने सीमा मुद्दों और आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी काम किया है। अमृतसर निवासी गुरमीत सिंह के पिता ने भारतीय सेना में और उनके बड़े भाई ने भारतीय वायु सेना में सेवा की।

उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कोर्स और नेशनल डिफेंस कॉलेज से स्नातक किया। उनके पास चेन्नई और इंदौर विश्वविद्यालयों से एम.फिल की दो डिग्री हैं। उन्होंने भारतीय सेना से अध्ययन अवकाश के दौरान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से भारत-चीन सीमा मुद्दे पर दो साल तक शोध कार्य किया। लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह सेना में इन्फैंट्री कंपनी कमांडर, ब्रिगेड कमांडर, ब्रिगेडियर जनरल, मेजर जनरल, सैन्य संचालन के अतिरिक्त महानिदेशक जैसे पदों पर रहने के बाद सेना के उप प्रमुख बने।

सेना में अपने कार्यकाल के दौरान वह एक दशक से अधिक समय तक कई विशेषज्ञ समूहों, संयुक्त कार्य समूहों, वार्षिक संवादों और चीन अध्ययन समूह की बैठकों का हिस्सा रहे। सेना में रहते हुए उन्होंने उत्तराखंड के बनबसा में भी काम किया। सेना में रहते हुए सिंह को थल सेनाध्यक्ष से चार राष्ट्रपति पुरस्कार और दो प्रशस्ति पत्र प्राप्त हुए। उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल भी मिल चुका है।

एडमिरल देवेन्द्र कुमार जोशी—

केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के राज्यपाल एडमिरल देवेन्द्र कुमार जोशी भारत के 21वें नौसेनाध्यक्ष रह चुके हैं।उन्होंने 31 अगस्त, 2012 से 26 फ़रवरी 2014 तक भारत की समुद्री सेना के प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने एडमिरल निर्मल वर्मा से यह पदभार ग्रहण किया था तथा उनके त्यागपत्र के बाद वाइस एडमिरल रॉबिन धवन इस पद पर आए। एडमिरल डीके जोशी ने 01 अप्रैल, 1974 को भारतीय नौसेना की एक्जीक्यूटिव ब्रांच में कमीशन प्राप्त किया था। लगभग 38 वर्ष के अपने लंबे सेवाकाल में उन्होंने विभिन्न कमान, कर्मचारी और निर्देशात्मक पदों पर हुई नियुक्ति के दौरान अपनी सेवा दीं।

उन्होंने सिंगापुर स्थित भारतीय उच्चायोग में 1996 से 1999 के दौरान रक्षा सलाहकार के रूप में भी सेवाएं दी। आईएनएस सिंधुरत्न दुर्घटना व इससे पहले हुई कई सिलसिलेवार दुर्घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने 26 फ़रवरी, 2014 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। ऐसा करने वाले वे भारत के पहले नौसेनाध्यक्ष हैं। उनके बाद उप-प्रमुख वाइस एडमिरल रॉबिन धवन को कार्यवाहक नौसेनाध्यक्ष बनाया गया था।

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