
कटिहार- 22 अक्टूबर। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का बिहार विधानसभा भवन शताब्दी वर्ष समारोह में शामिल होने के लिए तीन दिवसीय बिहार प्रवास का स्वागत करते हुए कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तारिक अनवर शुक्रवार को कटिहार में कहा कि राष्ट्रपति का जो पूरा कार्यक्रम था उससे ऐसा लगता है कि बिहार की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) सरकार ने अपनी कमजोरियों पर पर्दा डालने के लिए उन्हें यहां बुलाया था। क्योंकि राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि 2047 में बिहार देश के अग्रणी राज्य होगा। इतनी लंबी अवधि उन्होंने दे दी है। उस समय ना हम रहेंगे ना आप और ना ही नीतीश कुमार रहेंगे। तारिक अनवर ने कहा कि बिहार की आज की जो परिस्थिति है उस पर राष्ट्रपति ने कोई टिप्पणी नही की। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी यहां के वस्तुस्थिति से उन्हें आगाह नही किया। तारिक अनवर ने नीति आयोग का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट के अनुसार बिहार बहुत सारे क्षेत्र में पिछले पायदान पर है। पहले मुख्यमंत्री खासकर चुनाव के समय विशेष राज्य की बात करते थे। लेकिन राष्ट्रपति के सामने मुख्यमंत्री ने अपने उस मांग को दोहराया नही। इससे स्पष्ट होता है कि विशेष राज्य का मुद्दा उन्होंने छोड़ दिया है। बिहार उप-चुनाव में कुशेश्वर और तारापुर दोनों सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार उतारने के सवाल पर तारिक अनवर ने कहा कि हमारा गठबंधन राट्रीय जनता दल (राजद) के साथ था राजद ने एकतरफा फैसला कर दोनों सीटों पर अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस लिए हमारे सामने कोई दूसरा विकल्प नही था। तारिक अनवर ने कहा कि उप-चुनाव से कोई सरकार गिर जाएगी या बदल जाएगी ऐसा नही होता है। बंगला देश में दुर्गापूजा के समय से वहां के अल्पसंख्यक समुदाय के घरों, मंदिरों सहित अन्य हमलों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए तारिक अनवर ने कहा कि जहां भी अल्पसंख्यक समुदाय पर इस तरह की जघन्य अपराध हो रहा है वो उचित नही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चाहिए कि वे बंगला देश की सरकार पर कट्टरपंथियों के ऊपर कार्रवाई के लिए दबाव डाले। कश्मीर में हो रहे टारगेट किलिंग के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह दुखद घटना है। कश्मीर में बिहारी और कश्मीरी पंडितों की हत्या से स्पष्ट होता है कि भारत सरकार और गृहमंत्रालय पूरी तरह विफल साबित हो गई है। अनवर ने कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार ने दावा किया था कि अनुच्छेद 370 और 35 ए हटाने और कश्मीर के बंटवारे के बाद वहां की व्यवस्था नियंत्रण में होगा और आतंकवाद रुक जाएगा। लेकिन कश्मीर में फिर से आतंकवाद लौट आया है। इसके लिए भारत सरकार और गृहमंत्रालय जिम्मेदार है।



