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बिहार में नलजल योजना का हाल-बदहाल,अकाउंटेंट के भाई ने बिना एमबी के कर ली 18 लाख की अवैध निकासी

बिहार। नलजल योजना में अनियमितता का मामला लगातार सामने आ रहा है। मुख्यमंत्री के इस महत्वकांक्षी योजना को प्रायः पंचायतों के वार्ड में धरातल पर फलीभूत नही के बराबर किया गया है। ऐसा ही एक मामला बिहार के मधुबनी जिला अंतर्गत बासोपट्टी प्रखंड के अरघावा पंचायत में उजागर हुआ है। उक्त पंचायत के वार्ड संख्या पंद्रह में अभी तक योजना का कार्य अधूरा है। लेकिन संवेदक व अधिकारियों के द्वारा बिना एमबी करवाए अट्ठारह लाख रुपए की निकासी कर लिया गया है। इस बात की जानकारी देते हुए वार्ड क्रियान्वयन समिति के सचिव सुधीर यादव ने बताया कि वार्ड पंद्रह के वार्ड सदस्य कई वर्षों से बाहर है। जिसके कारण बगल के वार्ड सदस्य को अध्यक्ष बनाकर नलजल योजना का लंबित कार्य आरंभ किया गया। जिस संवेदक के द्वारा बैंक से राशि का निकासी किया गया है। उन्होंने कार्य को लेकर अभी तक कोई एग्रीमेंट नही किया है। साथ ही वार्ड क्रियान्वयन समिति से बैंक में सेंपल के नाम पर हस्ताक्षर युक्त तीन चेक लिया गया था। लेकिन उन तीनों चेक के माध्यम से तीन बार मे कुल अट्ठारह लाख रुपए की निकासी बिना कार्य पूर्ण किए निकाल लिया गया।  सचिव ने यह भी बताया कि जिस जमीन पर बोर्डिंग व टावर का कार्य किया गया है। उस जमीन मालिक से अनापत्ति पत्र भी नही लिया गया। बतादें की इससे पूर्व वहीं इससे पूर्व लेबर पेमेंट करने के लिए जब सचिव द्वारा दो लाख रुपए ट्रांसफर करवाया गया। उस समय बीडीओ के द्वारा बैंक से संपर्क कर ट्रांसफर की गई राशि वापस करवा लिया गया था।

अकाउंटेंट का भाई संवेदक के रूप में कर रहा है कार्य :-

जानकारी के मुताबिक जिस संवेदक द्वारा अवैध तरीके से राशि का निकासी किया गया है। वह उसी विभाग में कार्यरत अकाउंटेंट का भाई है। साथ ही अकाउंटेंट व संवेदक का कुछ महीनों पहले कथित ऑडियो भी वाइरल हुआ था। जिसमे सिरियापुर पंचायत के वार्ड एक मे ऑडिट करवाने के नाम पर पैसे लगने की बात अकाउंटेंट ने वार्ड सदस्य को बताया था। साथ ही इसी संवेदक के ऊपर वार्ड सचिव द्वारा अवैध तरीके से राशि का भी निकासी कर लिए जाने का आरोप लगाया गया था। जिसकी जांच अभी तक लंबित है।

कार्य पूर्ण होने के बाद किया जाता है एमबी उसके बाद ही होता है निकासी :-

नियमानुसार कार्य चरणबद्ध तरीके से पूर्ण होने पर कार्य से सम्बंधित कागजात जेई को उपलब्ध करवाने के बाद भुगतान के लिए एमबी किया जाता है। जैसे बोर्डिंग का कार्य पूर्ण होने पर तय राशि का एमबी कर निकासी किया जाता है। उसके बाद पाइपलाइन,कनेक्शन,वाटर टावर टंकी इत्यादि का एमबी बुक होता है। लेकिन यहां भ्रस्टाचार की हद पार करते हुए बिना एमबी का ही उठाव कर लिया गया अट्ठारह लाख रुपए।

क्या कहते हैं जेई :-
जेई सिकंदर कुमार से मामले पर बातचीत करने पर उन्होंने बताया कि कार्य से सम्बंधित किसी प्रकार की कागजात उपलब्ध नही करवाया गया है। साथ ही इससे पूर्व सचिव द्वारा दो लाख रुपए किसी खाता पर ट्रांसफर करवा दिया गया था। जिसको बैंक से संपर्क कर वापस करवाया गया। योजना से संबमधित कागजात मुहैया नही करवाने के कारण एमबी नही किया गया। बिना एमबी राशि का उठाव अवैध है। 

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