भारत

रसोई गैस उत्पादन में 40 फीसदी वृद्धि, कमर्शियल LPG की आपूर्ति 70 फीसदी तक बहालः केंद्र

नई दिल्ली- 27 मार्च। पश्चिम एशिया युद्ध के कारण वैश्विक रुकावटों के बावजूद भारत ने कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और पीएनजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है। साथ ही घरेलू रसोई गैस के उत्पादन में लगभग 40 फीसदी की वृद्धि हुई है। घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दी गई है, जबकि कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति को धीरे-धीरे 70 फीसदी तक बहाल कर दिया गया है, जिसमें प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। वहीं, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के कारण ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने शुक्रवार को यहां आयोजित प्रेसवार्ता में इसकी जानकारी दी। शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार ने उत्पाद शुल्क में कटौती की है। इसका बोझ उपभोक्ताओं पर डालने के बजाय स्वयं वहन किया है, जिससे पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क 10-10 रुपये प्रति लीटर कम हो गया है। अप्रैल 2022 से पेट्रोल और डीजल की कीमतें या तो कम हुई हैं या स्थिर बनी रही हैं। यहाँ तक कि अप्रैल 2025 में जब उत्पाद शुल्क बढ़ाया गया था तब भी इसका अतिरिक्त बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया।

सुजाता शर्मा ने कहा कि पीएनजी के विस्तार कार्य में तेजी लाई गई है, जिसके तहत प्रतिदिन 10,000 से अधिक नए कनेक्शन जोड़े जा रहे हैं। साथ ही जमाखोरी के खिलाफ़ कार्रवाई तेज कर दी गई है, जिसके तहत लगभग 3 हजार छापेमारी की गई है, सैकड़ों एफआईआर दर्ज की गई हैं और गैस वितरकों के खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई की गई है। सरकार ने एक बार फिर दोहराया है कि आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर अनावश्यक खरीदारी न करें।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा, “जैसा कि आप सभी जानते हैं, हम एक युद्ध जैसी स्थिति में हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध की वजह से कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की हमारी आपूर्ति पर असर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल और अन्य उत्पादों की कीमतें भी बहुत बढ़ गई हैं। हालांकि, भारत सरकार ने इस स्थिति को बहुत प्रभावी ढंग से संभालने के लिए कई स्तरों पर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं…।”

सुजाता शर्मा ने कहा, “इन सभी उपायों के परिणामस्वरूप 14 मार्च से लेकर 26 मार्च तक कमर्शियल उपभोक्ताओं को लगभग 30,000 टन कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति की गई है। जब भारत सरकार ने ये निर्णय लिए तो उसने यह सुनिश्चित किया कि रेस्तरां, ढाबों, होटलों, औद्योगिक कैंटीनों, प्रवासियों और श्रमिकों को प्राथमिकता दी जाए…।”

वहीं, सूचना और प्रसारण मंत्रालय में संयुक्त सचिव सेंथिल राजन ने कहा कि हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि वे अफ़वाहों पर विश्वास न करें और फेक न्यूज से सावधान रहें। उन्होंने कहा कि इससे पहले एलपीजी की कमी के बारे में गलत जानकारी फैलने से लोग घबराकर बुकिंग करने लगे थे, लेकिन उस स्थिति को काबू में कर लिया गया था।

उन्होंने कहा कि यह साफ करना जरूरी है कि किसी भी चीज की कोई कमी नहीं है और नागरिकों को पेट्रोल पंपों पर भागदौड़ करने की कोई जरूरत नहीं है। राजन ने कहा कि गलत जानकारी फैलाने की कोशिशें की जा रही हैं और लोगों से आग्रह है कि वे ऐसी बातों पर विश्वास न करें।

बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय में विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि पिछले 24 घंटों में खाड़ी क्षेत्र में किसी भी भारतीय ध्वज वाले जहाज या भारतीय नाविक के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। सिन्हा ने बताया कि फारस की खाड़ी में 20 भारतीय ध्वज वाले जहाज हैं, जिन पर 540 भारतीय नाविक सवार हैं और वे भी सुरक्षित हैं। सिन्हा ने बताया कि डीजी शिपिंग का ‘डीजीकॉम सेंटर’ चौबीसों घंटे काम कर रहा है। इसके अलावा, #Gulf क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों से 25 भारतीय नाविकों को जहाज़ से उतरने के बाद सुरक्षित रूप से भारत वापस लाया गया है।

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