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1937 में बीकानेर में लिखी ‘उर्दू रामायण’ का वाचन, उर्दू रामायण आज भी प्रासंगिक : मंत्री डॉ. कल्ला

बीकानेर- 23 अक्टूबर। पर्यटन लेखक संघ-महफिले अदब के साप्ताहिक अदबी कार्यक्रम के तहत रविवार को एक निजी होटल में 1937 में बीकानेर में लिखी ‘उर्दू रामायण’ का वाचन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिक्षा एवं कला-संस्कृति मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने कहा कि बीकानेर में लिखी “उर्दू रामायण” शहर की सांझी संस्कृति की प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राना लखनवी ने उर्दू रामायण लिख कर रामायण के सन्देश को जन साधारण तक पहुंचाने का कार्य किया है।

इस अवसर पर पूर्व महापौर हाजी मक़सूद अहमद ने कहा कि लिखी उर्दू रामायण का महत्व आज भी बरकरार है। ये सरल और सहज भाषा में लिखी हुई है, इसलिए इसे आम आदमी भी समझ सकता है। उर्दू रामायण का वाचन वरिष्ठ शाइर ज़ाकिर अदीब, असद अली असद व डॉ नासिर जैदी ने किया। श्रोताओं ने इसके बहुत से शेरों पर खूब दाद दी।

आयोजक संस्था के डॉ. ज़िया उल हसन क़ादरी ने बताया कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के लिए मौलवी बादशाह हुसैन खान राना लखनवी ने रियासतकाल में ये नज़्म लिखी, जिसे विश्वविद्यालय ने गोल्ड मेडल से नवाजा और महाराजा गंगा सिंह ने इसे स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया।

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार अशोक माथुर, प्रो अजय जोशी, प्रो नरसिंह बिनानी, डॉ जगदीश दान बारहठ, एडीओ सुनील बोड़ा, संगीता सेठी, मधुरिमा सिंह, कृष्णा वर्मा, शारदा भारद्वाज, इंजी गिरिराज पारीक, पूनमचंद गोदारा, रहमान बादशाह, माजिद खान ग़ौरी, शिवकुमार वर्मा, मुकुल वर्मा, अब्दुल शकूर बीकानवी, अंकिता माथुर, मास्टर रमज़ान अली व डॉ वली मुहम्मद गौरी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे।संचालन डॉ जिया उल हसन क़ादरी ने किया।

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