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हिलसा मछली की आपूर्ति के लिए बंगाल में फैल रही अफवाह, बांग्लादेश में भी नहीं मिल रही मछली

ढाका- 21 नवंबर। बंगाली समुदाय के लिए अति स्वादिष्ट मछली हिलसा की आपूर्ति को लेकर भारत के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है। इस प्रचार का बांग्लादेश में पाकिस्तानपरस्त लोग लाभ उठा रहे हैं।

दरअसल, दुर्गा पूजा के बाद से ही बंगाल में ऐसी खबरें चल रही थीं कि बांग्लादेश से हिलसा मछली की आपूर्ति पश्चिम बंगाल में की जा रही है। जबकि हकीकत यह है कि बंगाल तो क्या बांग्लादेश में भी हिलसा मछली नहीं मिल रही है। बताया गया कि बांग्लादेश से बंगाल में हिलसा मछली की आपूर्ति संबंधी फर्जी खबरें मछली कारोबारियों के फैलाए जाने का लाभ बांग्लादेश में पाकिस्तान परस्त लोग उठा रहे हैं। यह कहकर भारत के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है कि जब हिलसा मछली बंगाल में नहीं मिल रही तब भी भारत में पहुंचाई जा रही हैं।

मत्स्य पालन और पशुधन मंत्री रेजाउल करीम ने इस संबंध में हिन्दुस्थान समाचार से बात की है। उन्होंने बताया कि जब हिलसा मछली के प्रजनन के दौरान मछलियां पकड़ने पर रोक रहती है और अगर दोनों देशों के मछुआरे इसका पालन करेंगे तो इससे ना केवल भारत के खिलाफ दुष्प्रचार बंद होगा बल्कि हिलसा की आपूर्ति भी संभव हो सकेगी।

पत्रकार और शोधकर्ता कल्याण साहा ने बताया कि हिलसा का जीवन विविध है। यह मुख्य रूप से एक समुद्री मछली है लेकिन 80 प्रतिशत हिलसा प्रजनन के मौसम में मीठे पानी रहना पसंद करती है। हिलसा रोजाना करीब 71 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है। इसके लिए बांग्लादेश के अंतरदेशीय जल में हिलसा मछली पकड़ने को चार से 25 अक्टूबर तक कुल 22 दिनों के लिए रोक दिया गया था। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश में 432 किमी क्षेत्रफल के बारीसाल, भोला, पटुआखली, लक्ष्मीपुर, चांदपुर और शरीयतपुर में छह हिल्सा अभयारण्य हैं। बांग्लादेश में हिलसा ब्रीडिंग ग्राउंड के चार बिंदुओं की पहचान की गई है, जो लगभग सात हजार वर्ग किमी के क्षेत्र को कवर करता है। इतना सब होने के बाद भी पद्मा नदी में हिलसा नहीं है।

उन्होंने बताया कि पद्मा के तट पर मावा, पटुरिया, दौलतदिया और गोयल के घाटों पर बेची जाने वाली 90 प्रतिशत हिलसा चांदपुर के मेघना और बरिसाल की विभिन्न नदियों के मुहाने और समुद्र से लाई जाती है। तो जो लोग मावा-पटुरिया गोवालैंड फेरी टर्मिनल पर आते हैं और पद्मा से हिलसा खरीदते हैं, उनमें से ज्यादातर बारिसल या चांदपुर की हिलसा खरीद रहे हैं। अब पद्मा के किनारे के लोगों को हिलसा नहीं मिल रही है तो कोलकाता के नागरिकों को यह कैसे मिल सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप में फरक्का पार करने और हिलसा को गंगा तक ले जाने के लिए 361 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम हो रहा है।

नारज मावा घाट के मछली स्टोर कीपर अब्दुल मन्नान खान ने बताया कि फरदीपुर से पवना क्षेत्र तक पद्मा के लगभग सभी मछुआरे मावा घाट के गोदामों में हर तरह की मछलियां लाते हैं। वर्तमान में मावा के 40 फिश फार्म में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 किलोग्राम पद्मा हिलसा आती है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चांदपुर और बारीसाल की हिलसा भी पद्मा के नाम से बिकती है। उन्होंने कहा कि ढाका सहित स्थानीय लोगों को पद्मा हिलसा की आपूर्ति करना संभव नहीं है। बांग्लादेशियों का यह आरोप कि प्रतिबंध के दौरान भारतीय मछुआरे बांग्लादेश के जलक्षेत्र में मछली पकड़ रहे हैं।

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