बिहार

हाईकोर्ट ने सभी जिला अदालतों को पत्र भेजकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने का दिया निर्देश

प्रयागराज- 05 मई। इलाहाबाद हाईकोर्ट के महानिबंधक ने प्रदेश के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को पत्र भेजकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में सत्येंद्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई व अन्य के मामले में दिए गए आदेशों का पालन करने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट ने कहा है कि हिरासत व जमानत आदि में बरती जा रही लापरवाही को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जो आदेश जारी किए गए हैं, उनका अनुपालन कराया जाए। जमानत मामलों को दो सप्ताह और अग्रिम जमानत मामलों को छह सप्ताह में निस्तारित किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने सत्येंद्र कुमार अंतिल केस में जमानत व हिरासत को लेकर एक दिशा निर्देश जारी किया है और कहा है कि इस आदेश की प्रति को सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को इसके अनुपालन के लिए भेजा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने 11 जुलाई 2022 को पारित अपने आदेश में पुनः उल्लेख किया है कि किसी आरोपी अभियुक्त का जेल अपवाद व बेल नियम है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा निर्देश के क्रम में हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों को लेकर एक विस्तृत दिशा निर्देश जारी किया है। जिसका अनुपालन प्रदेश की सभी निचली अदालतों को करना होगा।

हाईकोर्ट द्वारा जिला अदालतों को जारी किया गया दिशा निर्देश इस प्रकार है।

-सीआरपीसी की धारा 309 का अनुपालन किया जाए।

-अनावश्यक केस सुनवाई से स्थगन पर सख्ती से रोक लगाई जाए।

-जांच एजेंसिया और उसके अधिकारी सीआरपीसी की धारा 41 और 41ए में दिए गए उपबंधों का पालन करने केलिए बाध्य हैं। कार्य में लापरवाही का पता चलने पर इसे उनके उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया जाए और जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाए। कोर्ट सुनिश्चित करे कि धारा 41 और 41ए का पालन किया जाए और अननुपालन की दशा में आरोपी अभियुक्त को जमानत दी जाए।

-दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 88, 170, 204 और 209 के तहत आवेदन पर विचार करते समय एक अलग जमानत आवेदन पर जोर देने की आवश्यकता नहीं है।

-सुप्रीम कोर्ट द्वारा सिद्धार्थ बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के केस में दिए गए निर्देशों का अनुपालन किया जाए।

-सीआरपीसी की धारा 440 के प्रकाश में उचित कदम उठाए जाएं, जिससे कि केस के विचारण के दौरान कैदी को रिहा होने में आसानी हो।

-सुप्रीम कोर्ट द्वारा भीम सिंह बनाम भारत सरकार के केस में दिए गए निर्देर्शों के तहत सीआरपीसी की धारा 436 ए का अदालतों द्वारा अनुपालन किया जाए।

-जमानत अर्जियों को दो सप्ताह की अवधि के भीतर निस्तारित की जाएं। जबकि, अग्रिम जमानत अर्जियों की सुनवाई छह सप्ताह में अपवादों और हस्तक्षेप करने वाले आवेदनों के साथ पूरी की जाएं।

-अधीनस्थ अदालतों के लिए यह बाध्य कर्तव्य है कि वह देश के कानून का पालन करे। लोगों को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद भी जहां उन्हें भेजने की आवश्यकता नहीं है और अगर पीड़ित पक्ष उसी के कारण आगे मुकदमेबाजी करते हैं तो मजिस्ट्रेट से न्यायिक कार्य वापस लेकर उन्हें कौशल के उन्नयन के लिए न्यायिक अकादमियों को भेजा जाए।

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