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स्वामी प्रसाद मौर्य का योगी मंत्रिमंडल से इस्तीफे के बाद सियासी घटनाक्रम

लखनऊ- 11 जनवरी। उत्तर प्रदेश सरकार के केबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद से लगातार सियासी घटनाक्रम बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस घटना के बाद समाजवादी पार्टी में लंबे समय से चली आ रही पारिवारिक कलह पर विराम लगाने की कोशिश भी दिखाई देने लगी है। समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद व अखिलेश के चाचा प्रोफेसर रामगोपाल यादव लंबे समय बाद शिवपाल यादव के घर पहुंचे हैं। समाजवादी पार्टी अपने पूरे कुनबे को बांधने में जुट गयी है।

केशव और गौरव भाटिया का आया ट्वीट—

स्वामी प्रसाद मौर्य मौर्य के मंगलवार को मंत्रिमण्डल से इस्तीफा देने के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता व योगी सरकार के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ट्वीट कर उन्हें पुन: विचार करने की अपील की है। केशव ने लिखा कि मुझे नहीं मालूम कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने यह निर्णय क्यों लिया है लेकिन मेरी उनसे अपील है कि वह पुन: अपने इस कदम पर विचार करें। अक्सर जल्दबाजी में लिया गया फैसला गलत होता है। दूसरी तरफ भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने एक ट्वीट कर केशव प्रसाद मौर्य को सूर्य और स्वामी प्रसाद मौर्य को अंधकार कहा। उनके इस ट्वीट पर विवाद बढ़ने लगा तब उन्होंने ट्वीट डिलीट कर दिया है।

भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने उप्र पर गड़ाई नजर—

पिछड़ों के बड़े नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के झटका देने के बाद भाजपा चौकन्नी हो गयी है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल को ऐसे नाराज नेताओं को संभालने की जिम्मेदारी सौंपी है। अब प्रदेश नेतृत्व ऐसे सभी नेताओं से सम्पर्क कर रहा है। वैसे एक बात और आ रही है कि जिन लोगों का टिकट कट रहा है, वह लोग भाजपा छोड़कर भाग रहे हैं। भाजपा के ऐसे कुछ विधायक हैं जिनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा है। उनकी रिपोर्ट पार्टी के नेतृत्व के पास है। नेतृत्व ने उन विधायकों को अल्टीमेटम दिया था। वहीं स्वामी के बारे में बताया जा रहा है कि वह अपने कई चहेतों को टिकट दिलाने का अभी से दबाव बना रहे थे। भाजपा नेतृत्व उनके प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया था। इसलिए वह साइकिल की सवारी करने जा रहे हैं।

इस्तीफे में क्या बोले बोले स्वामी—

स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि विपरीत विचारधारा के बावजूद सरकार में रहकर उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ काम किया और प्रदेश की सेवा की है। राज्यपाल को सौंपे इस्तीफे में उन्होंने लिखा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में श्रम सेवायोजन एवं समन्वय मंत्री के रूप में विपरीत परिस्थितियों और विचारधारा में रहकर भी बहुत ही मनोयोग के साथ उत्तर दायित्व का निर्वहन किया है। स्वामी ने लिखा है कि दलितों, पिछड़ों, किसानों, बेरोजगारों, नौजवानों एवं छोटे, लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की घोर उपेक्षात्मक रवैया के कारण उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे रहा हूँ। इस्तीफे के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा कि दो दिन बाद पता चल जाएगा कि भाजपा के कितने विधायक और योगी सरकार के मंत्री टूट रहे हैं। उनके भाजपा छोड़ने के असर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि 10 मार्च को इसका असर दिखाई देगा।

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