
सुप्रीम कोर्ट ने ‘गोधरा कांड’ के दोषियों की चार श्रेणी बनाने को कहा, मंगलवार को होगी सुनवाई
नई दिल्ली- 31 जुलाई। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के गोधरा कांड में 59 लोगों की हत्या के दोषियों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दोषियों की चार श्रेणी बनाने को कहा। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वकील संजय हेगड़े दोनों मिलकर कल यानी 1 अगस्त तक चार्ट तैयार करेंगे। इसके बाद मामले की सुनवाई 1 अगस्त को ही होगी।
कोर्ट ने कहा कि जमानत की मांग करने वाले दोषियों की पहली श्रेणी में उन्हें रखा जाए, जिन्हें ट्रायल कोर्ट से फांसी की सजा मिली हो और हाई कोर्ट ने उम्रकैद में तब्दील कर दिया हो। दूसरी श्रेणी पत्थरबाजी या संगीन आरोपों वाले दोषियों की हो। तीसरी श्रेणी उन दोषियों की हो, जिनकी उम्र 75 साल से अधिक हो और चौथी श्रेणी में उन दोषियों को रखा जाए, जो सिर्फ भीड़ का हिस्सा रहे हों।
सुप्रीम कोर्ट ने 21 अप्रैल को 2002 में गोधरा में ट्रेन के कोच में आग लगाकर 59 लोगों की हत्या के दोषी 8 लोगों को जमानत दी थी। इन सभी को ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट से उम्र कैद की सजा मिली थी। कोर्ट ने इन्हें 17-18 साल जेल में बिताने के आधार पर जमानत दी थी। कोर्ट ने निचली अदालत से फांसी की सजा पाने वाले 4 को जमानत से मना कर दिया था।
सुनवाई के दौरान 20 फरवरी को गुजरात सरकार के लिए पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने अपराध को जघन्य बताते हुए जमानत की मांग का विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों के नाम, अपराध में उनकी भूमिका और जेल में बिताए गए समय संबंधी चार्ट कोर्ट में दाखिल करने का निर्देश दिया था। 30 जनवरी को सुनवाई के दौरान दोषियों की ओर से कहा गया था कि उनका दोष सिर्फ यही था कि इन्होंने सिर्फ पत्थरबाजी की थी लेकिन वो उम्रकैद की सजा भुगत रहे हैं। गुजरात सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि सिर्फ पत्थरबाजी ही नहीं, इन लोगों ने ट्रेन की बोगी में आग भी लगाई थी।
पहले की सुनवाई के दौरान मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया था कि वह हर दोषी की भूमिका की जांच करेंगे कि क्या वाकई इनमें से कुछ लोगों को जमानत पर रिहा किया जा सकता है। 15 दिसंबर, 2022 को कोर्ट ने इस मामले के दोषी फारुक को जमानत दी थी। कोर्ट ने फारुक के 17 साल से जेल में होने के आधार पर जमानत दी थी।
गौरतलब है कि 27 फरवरी, 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 बोगी में आग लगाई गई थी, जिसमें 58 लोगों की मौत हो गई थी। साबरमती एक्सप्रेस अयोध्या से कारसेवकों को लेकर आ रही थी। गोधरा की इस घटना के बाद गुजरात में सांप्रदायिक दंगे हुए थे। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने 2011 में 31 लोगों को दोषी करार दिया था। इनमें से 11 को फांसी की सजा और 20 को उम्रकैद की सजा हुई थी। इस मामले में 63 अन्य आरोपितों को बरी कर दिया गया था। 2017 में गुजरात हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से फांसी की सजा मिले 11 दोषियों की सजा कम करते हुए उम्रकैद में तब्दील कर दिया था और 20 को मिली उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।



