बिहार

सत्ता में आने के साथ ही स्वयं सहायता समूह बढ़ाने का लिया था निर्णय: CM नीतीश

पटना- 29 जनवरी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार को समाधान यात्रा के क्रम में कैमूर जिले की जीविका दीदियों के साथ संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए। संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 24 नवंबर, 2005 को जब मुझे बिहार के लोगों ने काम करने का मौका दिया तो हमने स्वयं सहायता समूह की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया। उसके पहले जब हम सांसद और केंद्र में मंत्री थे तो कई जगहों पर जाकर हमने स्वयं सहायता समूह के कामों को देखा था।

सीएम ने कहा कि बिहार में स्वयं सहायता समूह की संख्या काफी कम थी। हमने स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं का नामकरण ‘जीविका’ किया तब से आप सभी जीविका दीदियां कहलाने लगीं। उस समय की केंद्र सरकार के मंत्री ने आकर स्वयं सहायता समूह के कामों को देखा और काफी तारीफ की और पूरे देश में इसका नामकरण ‘आजीविका किया यानि बिहार की जीविका पूरे देश में आ जाए। इसे भूलियेगा मत।

सीएम ने कहा कि नई टेक्नोलॉजी के आने से लोग पुरानी बातों को जल्दी भूल जाते हैं। आपकी संख्या बहुत बढ़ी है यह देखकर मुझे खुशी होती है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह से एक करोड़ 30 लाख से अधिक महिलायें जुड़ गई हैं। 10 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह का गठन हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों ने महिलाओं के उत्थान लिए काफी काम किया है। पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत सीट आरक्षित की गई है। वर्ष 1993-94 में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को आरक्षण देने के लिये लोकसभा एवं राज्यसभा की एक संयुक्त कमिटी बनी थी, उस समय हम सासंद थे और इस कमिटी के सदस्य भी थे। केंद्र ने महिलाओं को कम से कम एक तिहाई आरक्षण देने का नियम बनाया।

नीतीश ने कहा कि हमें जब मौका मिला तो हमने महिलाओं और पुरुषों को बराबर का अधिकार दिया क्योंकि महिलाओं की संख्या पुरुषों से कुछ ही कम थी। यहां काफी संख्या में महिलायें चुनाव जीतकर आ रही हैं। पहले सिर्फ अमीर परिवारों की गिनी-चुनी महिलायें ही चुनाव लड़ती थीं। हमलोगों ने वर्ष 2013 में बिहार पुलिस की बहाली में महिलाओं को 35 प्रतिशत का आरक्षण दिया। अब पुलिस बल में बड़ी संख्या में महिलाओं की भर्ती हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2015 के जुलाई महीने में जीविका समूह की एक बैठक में महिलाओं की मांग को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2016 में शराबबंदी लागू की गई। आप सभी गड़बड़ करने वाले लोगों को समझायें। शराब बुरी चीज है इसका सेवन न करें। समाज में लड़कियों और महिलाओं का काफी महत्व है। आप सभी दहेज प्रथा के खिलाफ निरंतर अभियान चलाते रहिये। दहेज का लेन-देन करने वालों की शादी में शामिल न हों। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष की उम्र में लड़की की, जबकि 21 वर्ष की उम्र में लड़के की शादी होनी चाहिये। इसके लिये कानून भी बना हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब पीना बुरी बात है। इसके संबंध में हमने बुकलेट भी छपवाई है और घर-घर इसे पहुंचाया गया है। आप खुद भी पढ़ें और दूसरे लोगों को भी पढ़ायें। एक सर्वे में यह बात सामने आई थी कि पति-पत्नी में यदि पत्नी मैट्रिक पास है तो देश में औसत प्रजनन दर 2 है और बिहार का भी 2 है। यदि पत्नी इंटर पास है तो देश का औसत प्रजनन दर 1.7 और बिहार का 1.6 है। हमलोगों ने जब काम शुरू किया उस समय बिहार का औसत प्रजनन दर 4.3 था जो अब घटकर 2.9 पर पहुंच गया है। इसे घटाकर 2 पर ले जाने का लक्ष्य है। इस तरह से अगले 15-20 वर्षों के बाद आबादी नियंत्रित हो जायेगी।

नीतीश ने कहा कि आबादी को नियंत्रित करने के लिये चीन ने भी कानून बनाया था लेकिन उससे कोई फायदा नहीं हुआ। लड़कियों के शिक्षित होने से राज्य का प्रजनन दर घटा है। इसके लिये कानून बनाने का कोई मतलब नहीं है। पति-पत्नी शिक्षित होंगे तो जनसंख्या अपने आप नियंत्रित रहेगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शराब पीने से होने वाली बीमारी के बारे में वर्ष 2018 में सर्वे की रिपोर्ट प्रकाशित की। इसमें बताया गया है कि पूरे एक वर्ष में 30 लाख लोगों की मृत्यु हुई जिसमें 5.3 प्रतिशत मौत शराब पीने से हुई।

संवाद कार्यक्रम में जीविका दीदियों ने मुख्यमंत्री को प्रतीक चिह्न और पौधा भेंटकर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न समूहों से जुड़ी जीविका दीदियों को 79 लाख 36 हजार रुपये का सांकेतिक चेक प्रदान किया। कैमूर जिले के 8,430 समूहों को 75 करोड़ रुपये का चेक प्रदान किया गया।

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