
शिक्षक ने विवाह में मिले दहेज को ठुकराया,दम्पति ने ली संविधान की शपथ
जौनपुर/यूपी- 27 नवंबर। सामाजिक परिवर्तन व्यक्तिगत स्तर से ही संभव है। कोई भी बदलाव तभी संभव है, जब आप स्वयं उदाहरण पेश करेंगे। ऐसा ही एक उदाहरण पेश किया है जनपद के सिरकोनी विकासखंड के खलीलपुर गांव के विमल कुमार यादव एवं बैरीपुर गांव की प्रियंका ने।
विमल यादव बलिया डिग्री कॉलेज में राजनीति विज्ञान विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। तथा प्रियंका जौनपुर में प्राथमिक स्कूल में सहायक अध्यापिका है। बीते 25 नवम्बर को दोनों की शादी हुई। विमल ने अपने विवाह संस्कार को एक अनूठे ढंग से सम्पन्न करवाया। विमल ने सदियों से प्रचलित दहेज प्रथा तथा आडम्बर को तोड़ते हुए एक नया संदेश देने की कोशिश की। दम्पति का मानना है कि आज हम स्वयं को आधुनिक मानते हैं लेकिन दहेज जैसी कुप्रथा आज भी हमारे समाज में व्याप्त है।
विमल ने तिलक के नाम पर वसूली जा रही मोटी रकम की आलोचना करते हुए एक भी रुपया व दहेज में मिलने वाली कार लेने से मना कर दिया। जबकि लड़की के परिवार वाले अपनी ख़ुशी से एक कार और दहेज़ के नाम पर मोटी रकम देने को तैयार थे। शनिवार को हिन्दुस्थान समाचार प्रतिनिधि से बात करते हुए विमल ने कहा कि आचरण के स्तर पर हम सिर्फ साक्षर हो पाए हैं, शिक्षित नहीं। शिक्षा से सामाजिक बदलाव होता है लेकिन हम दहेज जैसी घृणित और अन्य कुप्रथाओं से आज भी घिरे हुए हैं।
विमल का मानना है कि हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाए गए आंदोलनों से सीख लेने की जरूरत है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उन्होंने एक महत्वपूर्ण पहल की। उन्होंने अपनी ग्राम पंचायत के पंचायत भवन पर पौधरोपण कर कहा कि प्रत्येक नव दंपत्ति को नव जीवन की शुरुआत एक पौधा लगाकर करना चाहिए।
वहीं विमल और प्रियंका ने संविधान की शपथ लेकर एक दूसरे को पति-पत्नी के रूप में स्वीकार किया। पूर्वांचल विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक राकेश कुमार यादव ने इन्हें शपथ दिलाई। इनका मानना है कि संवैधानिक मूल्यों के जरिए ही भारतीय समाज को आडम्बरविहीन और समतामूलक बनाया जा सकता है।



