
वसीम रिजवी के समर्थन में आए स्वामी स्वरूपानंद
हरिद्वार- 20 नवंबर। उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी द्वारा लिखित पुस्तक मोहम्मद से फैला विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर जहां पुस्तक का तमाम मुस्लिम संगठन उग्र विरोध कर रहे हैं, तो वहीं शंकराचार्य परिषद के अध्यक्ष स्वामी स्वरूपानंद ने वसीम रिजवी का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि वसीम रिजवी ने अपनी पुस्तक में जो लिखा है, वो सही लिखा है। भारत के मुसलमानों को भी इसका अनुसरण करना चाहिए।
स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि वसीम रिजवी ने पुस्तक में सत्य बताते हुए कहा है कि सत्य के लिए ही जीना और सत्य के लिए मर जाना है, यह सनातन धर्म की पहचान है। मोहम्मद पुस्तक में वसीम रिजवी ने जो लिखा है वह काबिले तारीफ है। उन्होंने देश भर के मुसलमानों से यह आह्वान किया की मोहम्मद पुस्तक को एक बार पढ़ें। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने वसीम रिजवी के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराएं हैं, उनको मुकदमे वापस लेने चाहिए। साथ ही उत्तराखंड सरकार से भी उन्होंने निवेदन किया कि जल्द से जल्द वसीम रिजवी पर दर्ज मुकदमा वापस लिया जाए।
उल्लेखनीय है कि वसीम रिजवी के खिलाफ हरिद्वार कोतवाली में 16 नवंबर को मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले को लेकर हरिद्वार और ज्वालापुर कोतवाली में तीन अलग-अलग तहरीरें दी गई थीं। एक तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। बाकी तहरीरों को भी उसी मुकदमे में शामिल किया जाएगा। बता दें, रिजवी की पुस्तक का विमोचन 4 नवंबर को गाजियाबाद और 12 नवंबर को हरिद्वार में किया गया था।
वसीम रिजवी ने बीते शुक्रवार को स्वामी यति नरसिंहानंद, स्वामी दर्शन भारती आदि के साथ हरिद्वार वे प्रेस क्लब में मोहम्मद नाम की पुस्तक का विमोचन किया था। आरोप है कि वसीम रिजवी और स्वामी यति नरसिंहानंद ने मंच से भड़काऊ और आपत्तिजनक भाषण दिए, जिसकी वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने से मुस्लिम समुदाय में नाराजगी बढ़ गई है। मामले को लेकर रविवार को तहरीर दी गयी थी।
मुस्लिम समाज के लोगों का आरोप है कि हरिद्वार प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में जिस तरह के शब्दों का प्रयोग किया गया,वो नाकाबिले बर्दाश्त है। इसे किसी भी कीमत पर सही नहीं ठहराया जा सकता है।



