
मधुबनी/बिहार। राजनीति में पराजित होने के बाद कभी भी हौसला नही हारना चाहिए। राजनीति में चुनाव हार-जीत का खेल है। अगर चुनाव में पराजित होने के बाद जिसने कभी हौसला से हार गया,तो वह कभी भी राजनीति में कामयाब नही हो सकता। जो नेता हारने के बाद भी हौसला बुलंद रखता है,कभी न कभी कामयाब जरूर होता है। ऐसा ही कर दिखाया है मधुबनी जिला के राजनगर जिला परिषद क्षेत्र संख्या-32 से जीत दर्ज करने वाली महिला उम्मीदवार अमरिका देवी और उसके पूत्र छेदी राम ने। छेदी राम बहुत ही गरीब परिवार से आते है। जो रामपटटी चैक स्थित सड़क पर जुता-चप्पल पोलिस की दुकान चलाकर अपने पुरे परिवार का पालन-पोषन करते हुए राजनीति में पुरी उम्मीद के साथ कभी सांसद,कभी विधायक तो कभी जिला परिषद का चुनाव लड़ता रहा। परंतू उसे हमेषा निरासा ही लगी। परंतू उसने कभी भी हौसला नही हारा। पंचायत चुनाव 2021 में राजनगर जिला परिषद क्षेत्र संख्या-32 अनुसुचित जाति की महिला के लिए सुरक्षित था। जिस क्षेत्र से छेदी राम ने अपनी मां अमरिका देवी को चुनावी मैदान में उतार दिया। तथा गरीबी के कारण अपने साईकिल पर बैनर-पोस्टर लगाकर जिला परिषद क्षेत्र की पंचायतों में प्रचार-प्रसार करता रहा। उसे नही मालुम था कि उसकी मां भारी मतों से विजय घोषित की जाएगी। सिर्फ वह अपनी मेहनत करता रहा। भगवान ने उसकी मेहनत और गरीबी के साथ-साथ जज्बा को देखा। तथा उसकी मां अमरिका देवी को जीत का सेहरा पहना दिया। इस लिए राजनीति में पराजित के बाद कभी भी हौसला नही हारना चाहिए। मालुम हो कि वर्ष 2015 में छेदी राम भारतीय मित्र पार्टी से विधानसभा चुनाव राजनगर सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ा। परंतू उसे निरास ही हाथ आया। साथ ही छेदी राम सांसद,विधानसभा,एमएलसी एवं जिला परिषद का भी चुना लड़ा। परंतू उसे निरास हाथ आयी थी। परंतु मां अमरिका देवी ने जीत दर्जकर अपने परिवार की किस्मत बदल दी।
रिर्पोट- ब्यूरो,बिहार।



