भारत

मुस्लिम बुद्धिजीवियों के प्रतिनिधिमंडल ने केन्द्रीय गृह मंत्री से की मुलाकात, मॉब लिंचिंग,मुस्लिम आरक्षण, कश्मीर सहित दर्जनों मुद्दे पर हुई चर्चा

नई दिल्ली- 05 अप्रैल। मुस्लिम धर्मगुरुओं और बुद्धिजीवियों के एक 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के नेतृत्व में मंगलवार रात गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की। मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुस्लिम समुदाय से जुड़ी चिंताओं को अमित शाह के समक्ष रखा। गृहमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को ध्यान से सुना और उन्हें सभी जरूरी आश्वासन दिये।

मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सांप्रदायिक दंगों, नफरती अभियान, इस्लामोफोबिया, मॉब लिंचिंग, समान नागरिक संहिता, मदरसों की स्वायत्तता, कर्नाटक में मुस्लिम आरक्षण, कश्मीर की वर्तमान स्थिति, असम में जबरन बेदखली और वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों को लिखित रूप में प्रस्तुत किया। एक घंटे से अधिक चली इस बैठक में मौलाना कलीम सिद्दीकी और उमर गौतम की जमानत का मुद्दा भी उठाया गया।

जमीअत की तरफ से आए बयान के अनुसार बातचीत के आरंभ में जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि देश के दूसरे सबसे बड़े बहुसंख्यक वर्ग को निराशा के अंधेरे में धकेलने का प्रयास किया जा रहा है और नफरत एवं संप्रदायिकता की खुलेआम अभिव्यक्ति द्वारा देश के वातावरण को दूषित करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। इसके कारण देश की आर्थिक और व्यावसायिक हानि होने के अलावा देश की अच्छी छवि भी धूमिल हो रही है। इन परिस्थितियों में हम आपसे यह आशा करते हैं कि इसके समाधान के लिए आप तत्काल कदम उठाएंगे।

गृह मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा प्रस्तुत की गई मांगों को ध्यान से पढ़ा और देश की सांप्रदायिक स्थिति पर कहा कि इस बार रामनवमी त्योहार के अवसर पर जो धार्मिक तनाव और हिंसा हुई है, उससे हम भी चिंतित हैं। जिन राज्यों में हमारी सरकारें नहीं हैं, वहां हमने राज्यपाल या मुख्यमंत्री के जरिए इसे नियंत्रित करने की कोशिश की गई है और जहां हमारी सरकारें हैं, वहां जो भी घटनाएं हुई हैं, जांच के बाद दोषियों विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

गृह मंत्री ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं के संबंध में कहा कि मॉब लिंचिंग की घटनाएं देश के किसी भी हिस्से में हुई हों, हमें यह देखने की जरूरत है कि हत्या की स्थिति में क्या धारा 302 के तहत हत्या का मामला दर्ज हुआ है या नहीं, अगर नहीं हुआ है, आप हमें लिख कर भेजें। हम इसे तत्काल सुनिश्चित करेंगे। इस संबंध में जमीअत उलमा-ए-हिंद जल्द ही ऐसी घटनाओं की सूची बनाकर गृह मंत्री को भेजेगी। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से मेवात में एक के बाद एक हुई घटनाओं का भी उल्लेख किया और बताया कि वहां गौरक्षकों के नाम पर अराजक तत्वों का एक गिरोह है, जैसा कि स्टिंग ऑपरेशन में भी सामने आया है, उस पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है। इस पर गृह मंत्री अपनी सहमति व्यक्त की।

मीडिया के जरिए मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने पर उन्होंने कहा कि मीडिया के शिकार तो स्वयं भी हैं। इस्लामिक मदरसों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं है कि मदरसों में कुरान और हदीस की शिक्षा दी जाए लेकिन इन मदरसों में बच्चों को आधुनिक शिक्षा भी प्रदान की जानी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने मुस्लिम छात्रों के लिए मौलाना आज़ाद छात्रवृत्ति का मुद्दा भी उठाया।

गृह मंत्री ने कर्नाटक में मुस्लिम आरक्षण समाप्त किए जाने के संबंध में कहा कि जिन मुसलमानों को पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण मिल रहा था, वह मिलता रहेगा। अलबत्ता पहले की सरकारों ने सभी मुसलमानों को पसमांदा बना दिया था। इसलिए जो पसमांदा जातियों से संबंध नहीं रखते, उनको ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आरक्षण मिलेगा। इस संबंध में जो भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, हम उसे जल्द दूर करेंगे। इसके साथ ही कर्नाटक सरकार के कानून मंत्री द्वारा भी इस पर स्पष्टीकरण दिलवाएंगे।

कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर जब प्रतिनिधिमंडल ने आलोचना की, तो गृह मंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 370 को हिंदू और मुसलमानों की समस्या नहीं बनाया जाना चाहिए, यह स्टेट पॉलिसी का हिस्सा है, लेकिन जहां तक वहां अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न की शिकायत है, तो इस संबंध में कोई विशेष मामला हो तो वह हमारे संज्ञान में लाईए, हम कठोर कार्रवाई करेंगे।

गृह मंत्री ने कहा कि उनकी सरकार किसी समुदाय के साथ भेदभाव नहीं करती है। सरकार की नीतियों और योजनाओं में हिन्दू-मुसलमान सब शामिल हैं, हम अलग से किसी के लिए योजना नहीं बनाते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने एक बार फिर दोहराया कि समस्या सरकारी योजनाओं की नहीं है, बल्कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है, हेट क्राइम और इस्लामोफोबिया की घटनाओं ने देश की अच्छी छवि को प्रभावित किया है। इस संबंध में सरकार को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए कदम उठाना चाहिए।

इस प्रतिनिधिमंडल में मौलाना महमूद असद मदनी अध्यक्ष, जमीअत उलमा-ए-हिंद, मौलाना असगर अली इमाम महदी सलफी अमीर मरकजी जमीयत अहले हदीस हिंद, मौलाना शब्बीर नदवी, अध्यक्ष नासेह एजुकेशन ट्रस्ट बैंगलोर, कमाल फारूकी, सदस्य ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, प्रो. अख्तरुल वासे,अध्यक्ष खुसरो फाउंडेशन,दिल्ली, पीए इनामदार,अध्यक्ष, एमसीई सोसायटी, पुणे, महाराष्ट्र, डॉ. ज़हीर काज़ी,अध्यक्ष, अंजुमन-ए-इस्लाम, मुंबई, मौलाना नियाज अहमद फारूकी, महासचिव जमीअत उलेमा हिंद समेत जमीअत के कई पदाधिकारी शामिल थे।

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