
बेगूसराय। शुक्रवार को बरौनी हर्ल कारखाना के निरीक्षण के दौरान हर्ल कारखाना के सभागार में प्रेस वार्ता के दौरान स्थानीय सांसद सह केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि हर्ल कारखाना का मैकेनिकल कामिशनिंग 21 जनवरी 2022 तक पूरा होगा। साथ ही फरवरी 2022 तक हर्ल कारखाना से यूरिया खाद का उत्पादन शुरू हो जाएगा।देश के यशस्वी पीएम नरेन्द्र दामोदरदास मोदी भारत में उर्वरक उत्पादन व हरित क्रांति की दिशा में लिए गए ठोस कदम का नतीजा है कि देश में बंद पड़े तीन खाद कारखाना गोरखपुर, बरौनी एवं सिंदरी को चालू किया जा रहा है। जिसके तहत बरौनी में हिन्दुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड हर्ल कारखाना आगामी मार्च 2022 को यूरिया का कामर्शियल उत्पादन शुरू हो जाएगा।जिसकी सहमति हर्ल कारखाना के मुख्य महाप्रबंधक गौतम देव ने भी दी।विदित हो कि हर्ल कारखाना के भीतर कैप्टिव पावर प्लांट में 24,32 मेगावाट क्षमता बिजली जेनरेट करेगा। साथ ही छह किलोमीटर की दूरी में विकास कार्य करने का भी आग्रह किया।इस अवसर पर हर्ल के मुख्य महाप्रबंधक गौतम देब, परियोजना महाप्रबंधक पी के बोरदोलोई,मुख्य परियोजना प्रबंधक संजय कुमार, प्रबंधक मानव संसाधन मनीष कुमार, पीडीआईएल के आरसीएम निकेश मणिक्कारा,टेकनीप के प्रोजेक्ट अशोक बिट्टा, एल एण्ड टी के आरसीएम डी मणिमारन, सांसद प्रतिनिधि अमरेन्द्र कुमार अमर, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता सुनील कुमार, जिला उपाध्यक्ष कुंदन भारती, मीडिया प्रभारी सुमित सन्नी, चंचल कुमार सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।वहीं केन्द्रीय मंत्री श्री सिंह ने कहा कि विगत दिनों कोरोना और अत्यधिक बारिश की वजह से हर्ल कारखाना के निर्माण कार्य ससमय पूरा नहीं हो सका।कोरोना के दौरान हर्ल के पदाधिकारी व कर्मचारी की मौत हो गई थी।जिस वजह से अभी इन लोगों को कुछ नहीं कह रहा हूं लेकिन दिसंबर माह से हर माह एक दिन हर्ल कारखाना का निरिक्षण किया जाएगा।उन्होंने कहा कि देश में यूरिया की खपत को देखते हुए हर्ल कारखाना से यूरिया उत्पादन शुरू होने के बाद से एक वर्ष में 12 लाख 70 हजार मैट्रिक टन यूरिया उत्पादन होगा। जबकि प्रतिदिन 2200 मैट्रिक टन यूरिया उत्पादन किया जाएगा।उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था एफ ए ओ ने बताया कि भारत की 2050 तक बहुत अधिक हो जाएगा। भारत की आबादी प्रति वर्ष दो से ढाई करोड़ आबादी बढ़ रही है।जो चिंता का विषय है। जिसको लेकर मोदी सरकार बंजर भूमि को खेती योग्य बनाने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। उन्होंने हर्ल कारखाना से एक नये माॅडल के रूप में काम करने का आग्रह किया है। बेगूसराय जिले में सबसे अधिक ताकत ग्रामीण क्षेत्रों में दूध है। पन्द्रह लाख लीटर दूध प्रतिदिन बेगूसराय में होता है। उन्होंने क्वालिटी आफ ग्रीन फर्टिलाइजर बनेगा।अपनी गाय,अपना खेत,अपना गोबर। उन्होंने हर्ल कारखाना से आग्रह किया है कि हर्ल कालोनी में तालाब की मरम्मति और सौन्दर्यीकरण कर छठ पूजा करने लायक बनाने एवं हर्ल कारखाना के सामने खेल मैदान में प्रकाश की व्यवस्था एवं रनवे ट्रैक बनाने को कहा है ताकि बीहट सहित आसपास के सैकड़ों युवा अपने भविष्य को संवारने में मददगार साबित हो।इसी दौरान हर्ल कारखाना के भीतर कैप्टिव पावर प्लांट के लिए कमीशनिंग गतिविधि का उद्घाटन पूजा पाठ नारियल फोड़ने के बाद बटन दबाकर किया।साथ ही सीपीपी पावर प्लांट की जानकारी ली। साथ ही कारखाना का निरिक्षण करते हुए पौधारोपण किया।



