बिहारभारत

महान समाजवादी नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव का 75 वर्ष की उम्र में निधन

नई दिल्ली- 12 जनवरी। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव का निधन हो गया। इसकी सूचना गुरुवार देर रात उनकी बेटी सुभाषिनी शरद यादव ने ट्वीट कर दी। फोर्टिस अस्पताल की ओर से जारी बयान के अनुसार शरद यादव को अचेत अवस्था में अस्पताल लाया गया था। उनकी शरीर में कोई मूवमेंट नहीं थी। एसीएलएस प्रोटोकॉल के तहत उन्हें सीपीआर दिया गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

वे 75 वर्ष के थे, उनका जन्‍म एक किसान परिवार में 1 जुलाई 1947 को मध्‍यप्रदेश के होशंगाबाद के बंदाई गांव में हुआ था।

शरद यादव ने डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों से प्रेरित होकर सक्रिय युवा नेता के तौर पर कई आंदोलनों में हिस्सा लिया और मीसा के तहत 1969-1970, 1972 एवं 1975 में हिरासत में लिए गए। उन्‍होंने मंडल कमीशन की सिफारिशों को लागू करने वाले कार्य में अहम भूमिका निभाई। पहली बार 1974 में वे मध्य प्रदेश की जबलपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। यह जेपी आंदोलन का समय था और वे हल्दर किसान के रूप में जेपी द्वारा चुने गए पहले उम्मीदवार थे।

1977 में भी वे इसी लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे। उस वक्त वे युवा जनता दल के अध्यक्ष रहे। 1986 में वे राज्यसभा से सांसद चुने गए और 1989 में यूपी की बदाऊं लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर तीसरी बार संसद पहुंचे। वे 1989-1990 में टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री रहे।

शरद यादव वर्ष 1991 से 2014 तक बिहार की मधेपुरा सीट से सांसद रहे। 1995 में उन्हें जनता दल का कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया और 1996 में वे पांचवीं बार लोकसभा का चुनाव जीते। 1997 में उन्हें जनता दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। 1998 में उन्‍होंने जॉर्ज फर्नांडीस की मदद से जनता दल यूनाइटेड पार्टी बनाई, जिससे नीतीश कुमार जनता दल छोड़कर जुड़ गए।   

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में 13 अक्टूबर 1999 को उन्हें नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया। तथा 01 जुलाई 2001 को वे केंद्रीय श्रम मंत्रालय में कैबिनेट मंत्री चुने गए। शरद यादव 2004 में राज्यसभा से दूसरी बार सांसद बने और गृह मंत्रालय के अलावा कई कमेटियों के सदस्य रहे। 2009 में वे 7वीं बार सांसद बने और उन्हें शहरी विकास समिति का अध्यक्ष बनाया गया। 

2012 में संसद में उनके बेहतरीन योगदान को देखते हुए ‘उत्कृष्ट सांसद पुरस्कार 2012’ से नवाजा गया। लोकसभा अध्‍यक्ष मीरा कुमार ने संसद के सभी सदस्‍यों की उपस्थिति में उन्‍हें यह पुरस्‍कार सौंपा। 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्हें मधेपुरा सीट पर हार का सामना करना पड़ा।

शरद यादव सात बार लोकसभा के सदस्य चुने गए और तीन बार राज्यसभा के सदस्य रहे।

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