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मनुष्य ही नहीं पूरी प्रकृति के लिए हानिकारक है स्मॉग: मौसम वैज्ञानिक

कानपुर- 12 नवम्बर। सर्दी के दिन आ रहे हैं और तापमान लगातार कम हो रहा है तो वहीं स्मॉग बढ़ता ही जा रहा है। यह स्मॉग मनुष्य को तो नुकसान करेगा ही साथ ही पौधों, जानवरों और पूरी प्रकृति के लिए हानिकारक है। कानपुर में देखा जा रहा है कि स्मॉग बराबर आसमान में बढ़ता ही जा रहा है। यह बातें सीएसए के मौसम वैज्ञानिक डा. एसएन सुनील पाण्डेय ने कही। चन्द्रशेखर आजाद कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डा. एसएन सुनील पाण्डेय ने बताया कि यह देखना भी प्रासंगिक है कि स्मॉग वातावरण में पाए जाने वाले विभिन्न रसायन जीवन को किस हद तक प्रभावित करते है। कहा कि, परोक्सी एसिटिल नाइट्रेट के कारण ही आंखों में जलन एवं दूसरी परेशानियां होने लगती है। दूसरी गैस ओजोन है जो वातावरण में होती है। यह मानव जीवन और वनस्पतियों को प्रभावित करती है। ओजोन का प्रभाव दोहरा असर करता है। यह हमारे जीवन को तो प्रभावित करता ही है, साथ साथ पेड़ पौधों पर अपना खराब असर डालकर पर्यावरण को विश्व के लिए और खतरनाक बना देता है।

अस्त व्यस्त हो जाता है पर्यावरण—

बताया कि सर्दियों के दौरान जब भारी यातायात उच्च तापमान आदि के कारण वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है, और हवा की गति कम होती हैं, यह धुआं और धुंध को एक जगह स्थिर होकर स्मॉग को बनाती है और धरती के समीप जहां लोग सांस ले रहे हैं पर अधिक प्रदूषण को बढ़ा देती है। यह दृश्यता बाधित होती है और पर्यावरण को भी अस्त-व्यस्त कर देती है।

क्या है ओजोन—

बताया कि ओजोन पृथ्वी के ऊपर उच्च में मौजूद स्ट्रैटोस्फियर परत में रंगहीन, गंधहीन गैस है, जो हमें यूवी किरणों जैसे कि सौर विकिरण (यूवी रेज) से बचाती है और एक चादर की तरह कार्य करती है। दूसरी ओर जमीनी स्तर पर ओजोन मूल रूप से कुछ मौसम की स्थिति या गर्मी व्युत्क्रम के कारण है। यह स्मॉग के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में कार्य करते हैं जिसके परिणाम स्वरूप आंखों की जलन, श्वसन संकट आदि होते हैं। यह न केवल मनुष्य के लिए हानिकारक है, बल्कि पौधों, जानवरों और मानव निर्मित सामग्री के लिए भी उतनी ही हानिकारक है।

यह होती है स्वास्थ्य समस्याएं—

बताया कि स्मॉग के प्रकोप से अस्थमा के लक्षण बदतर हो जाते हैं और अस्थमा अटैक भी हो सकते हैं। हृदय (दिल) की बीमारी, ब्रोन्कियल बीमारी की वजह से कई लोग मर रहे हैं। प्राकृतिक तत्व विटामिन डी का उत्पादन कम होता है, जो लोगों के बीच रिकेट्स को बढ़ावा देता है। छाती में जलन, खांसी, कैंसर या संक्रमण, गले का कैंसर और निमोनिया का होना। श्वास की समस्या, श्वास लेने में दर्द, आंखों में जलन और फेफड़ों के कैंसर जैसे कई रोगों में वृद्धि। असामान्य रूप से थका हुआ महसूस करना, सिर में दर्द, कम ऊर्जा, घबराहट। यह फसलों और जंगलों को भी भारी नुकसान पहुचाती है। सब्जियों और फसलों मुख्य रूप से सोया सेम, गेहूं, टमाटर, मूंगफली और कपास जब स्मोग के संपर्क में आती हैं तो संक्रमण के अधीन हो जाती हैं। विभिन्न जानवरों की प्रजातियों और ग्रीन लाइफ को भी यह प्रभावित करती है।

इनके लिए है सबसे अधिक जोखिम—

वैज्ञानिक ने बताया कि वैसे तो स्मॉग हम में से हर एक को प्रभावित करता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए विशेष रूप से हानिकारक है। बताया कि बच्चों के फेफड़े अभी भी विकास कर रहे हैं और गर्मी के दिनों में वे बहुत ज्यादा समय बाहर खेलने में बिताते हैं ऐसे में उनमें सांस लेने के दौरान अधिक प्रदूषण से प्रभावित होने का खतरा रहता है। वे लोग जो अस्थमा की समस्या जैसे फेफड़ों की बीमारी आदि से पीड़ित हैं। ऐसे लोग जिन्हें दिल की समस्या है। मधुमेह के रोगियों को भी क्योंकि वे हृदय रोग होने की संभावना के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। वरिष्ठ नागरिकों को उच्च जोखिम न केवल अपनी उम्र की वजह से है बल्कि उनके कमजोर दिल, फेफड़े और प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण भी हैं। एलर्जी से प्रभावित लोग, गर्भवती महिलाओं और धूम्रपान करने वाले लोगों को भी सावधान रहने की जरूरत है।

ऐसे करें सुरक्षा—

वैज्ञानिक ने बताया कि यह जरूरी है कि परिवार और अन्य लोगों को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई (AQI) पर ईपीए (पर्यावरण संरक्षण एजेंसी) की रिपोर्ट (EPA (Environment Protection Agency report) के बारे में सूचित किया जाए, जिससे आमतौर पर प्रदूषक मानक सूचकांक यानि अपने क्षेत्र में ओजोन के स्तर के बारे में जानकारी रहे। और जहां कहीं भी आप यात्रा कर रहे हैं वहां के ओजोन स्तर पर भी निगरानी रखें। एक विशेष क्षेत्र में ओजोन के स्तर की जांच करने के लिए; राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय एजेंसियों के पास हवा उपकरण हैं जो ओजोन के स्तर को देखती हैं और स्मोग के नकारात्मक प्रभाव जो कि स्वास्थ्य पर पड़ते है उसके बारें मे बताती हैं। एक्यूआई रिपोर्ट के अनुसार हवा के स्तर को जीरो से 300 के बीच रखा है। 150 से ऊपर स्तर किसी के लिए भी अस्वस्थ माना जाता है और 200 से ऊपर का स्तर बिलकुल ही अस्वस्थ कहा जाता है और ये जोखिम के स्तर सूचकांक पर लाल और बैंगनी रंग के अनुरूप हैं।

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