
मधुबनी नगर परिषद के निगम बनने के सपने पर लगा ग्रहण
मधुबनी- 12 फरवरी। मधुबनी शहर के लिए निराशाजनक मामला सामने आया है। मधुबनी नगर परिषद के निगम में अपग्रेड करने के लिए जरूरी जनसंख्या ही कम हो गयी है। सरकार द्वारा इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की अधिसूचना जारी किया गया है। परंतु निगम के पुराने और नए एरिया को मिलाकर आबादी अधिकतम डेढ़ लाख ही हो रही है। इसतरह जरूरी आबादी से लगभग 70 हजार की आबादी कम हो रही है। सांख्यिकी विभाग से जनसंख्या की मिली रिपोर्ट के बाद यह मामला सामने आया। इसके बाद नगर विकास व आवास विभाग हरकत में आ गया। तथा शीघ्र ही मामले की जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया। इसके बाद जिला में हड़कंप मचा हुआ है। इस निराशाजनक रिपोर्ट के बाद हरकत में आया प्रशासन इसकी जांच के लिए चार सदस्यीय टीम का गठन कर दिया है। इस टीम में अपर समाहत्र्ता,उप विकास आयुक्त एवं ओएसडी को भी शामिल किया गया है। टीम के सदस्य इस बिन्दु पर कुछ भी बताने से इंकार कर रहे हैं। लेकिन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कम हो रही आबादी के कारण निगम के प्रस्ताव को खारिज करना विवशता होगी।
नए एरिया के अधिकतर आबादी ग्रामीण—
प्रावधान के अनुसार निगम में अपग्रेड होने के लिए जुड़ने वाले एरिया में 40 फीसदी से अधिक एरिया खेतिहर नहीं होना चाहिए। सेवा व व्यवसाय क्षेत्र में अधिकतर आबादी को जुड़ा होना चाहिए। जबकि यहां पर इसके विपरीत अधिकतर आबादी कृषि पर ही निर्भर है। अब नये एरिया को जोड़कर आबादी की भरपायी हुई तो वहां के एरिया में 80 फीसदी लोगों की आजीविका का साधन कृषि है। मालूम हो कि नगर परिषद में 30 वार्ड हैं। शहर के आसपास का एरिया का शहरीकरण हुआ है। जैसे सप्ता,भौआड़ा,चकदह,रांटी, लहरेयिागंज,मंगरौनी एकादश रूद़मंदिर व आसपास के एरिया में काफी तादाद में लोग बसे हैं। जिसे प्रथम फेज में परिषद में शामिल न कर एकबार में ही निगम बना दिया गया। जानकारों की माने तो पहले इस एरिया को परिषद में शामिल कर 40 वार्ड बनाया जाता। इसके बाद आबादी सघन होने और इस क्षेत्र से जुड़े एरिया के शहरीकरण के बाद इसका अपग्रेडशन होना था। परंतु ऐसा नहीं हुआ है। तथा सीधे निगम में अपग्रेड कर दिया गया। जिससे यह समस्या उत्पन्न हो रही है।
इसतरह हुआ निगम का निर्माण—
सरकार द्वारा शहरीकरण के मांगे जाने वाले निर्देश के आलोक में यहां के लिए रहिका,राजनगर एवं पंडौल के सीओ के रिपोर्ट पर जिला प्रशासन के द्वारा नवंबर 2018 में निगम का प्रस्ताव विभाग को भेज दिया गया। लेकिन इसदौरान सांख्यिकी विभाग से जनसंख्या की रिपोर्ट नहीं लेकर औसतन रिपोर्ट ही भेज दिया गया। फिर 2020 में मांगे गये प्रतिवेदन के संदर्भ में भी उसी जनसांख्यिकी रिपोर्ट को भेज दिया गया। वार्ड परिसीमन के आदेश के बाद जब जनसंख्या की जानकारी जुटायी गयी,तो यह मामला सामने आया है। इसके बाद वार्ड परिसीमन की प्रक्रिया से मधुबनी नगर निगम को अलग कर दिया गया है। वहीं स्थानीय स्तर पर एक जांच टीम का गठन कर दिया गया है।



