
बिहार में नगर निकाय चुनाव ने भाजपा के मंसूबे पर पानी फेरा: JDU
पटना- 29 दिसंबर। जदयू ने कहा कि बिहार में नगर निकाय चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने के साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के इस सम्बन्ध में फैलाए गए झूठ, अफवाह और जनता को गुमराह करने के कुत्सित प्रयासों पर पानी फेर दिया। भाजपा को अब बिहार के पिछड़ा और अति-पिछड़ा समाज से माफी मांगनी चाहिए।
जदयू के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक झा एवं अनुप्रिया ने प्रदेश जदयू कार्यालय में आज पत्रकारों से बातचीत में कहा कि क्या अब भाजपा उत्तर प्रदेश में इलाहबाद हाई कोर्ट द्वारा निकाय चुनाव में आरक्षण को लेकर लगाये गए रोक पर भी उतना ही हाय-तौबा मचाएगी? हमें पूरा विश्वास है कि भाजपा ऐसा नहीं करेगी। क्योंकि, उनका अति-पिछड़ा आरक्षण को लेकर दोहरे चरित्र का इतिहास बहुत पुराना है।
प्रवक्ताओं ने कहा कि 4 मार्च, 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने पिछड़ा आयोग बनाकर ट्रिपल टेस्ट करवाने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद अक्टूबर 2021 में गुजरात के गांधीनगर में बगैर ट्रिपल टेस्ट के निकाय चुनाव करवाया गया। इसके अलावा गुजरात में ही दिसंबर 2021 में पंचायत चुनाव भी बिना ट्रिपल टेस्ट के ही कराये गए। इतना ही नहीं बिहार में भी जब सितम्बर 2021 में बिना ट्रिपल टेस्ट के पंचायत चुनाव कराये गए तो उस समय भी भाजपा ने मुंह पर पट्टी बांध ली थी।
प्रवक्ताओं ने कहा कि देश में पिछड़ों और अति पिछड़ों के आरक्षण सम्बन्धी सभी समस्याओं का एकमात्र हल जातिगत जनगणना है। यही कारण है कि देश में बने सभी पिछड़े आयोगों ने अपने रिपोर्ट में एक स्वर में जातीय आकंड़ों की कमी को सबसे बड़ी समस्या बताया है। नीतीश कुमार ने इस विषय को गंभीरता से समझा। कुछ ही महीनों में बिहार सफल रूप से जातिगत जनगणना करने वाले वाला देश का पहला राज्य होगा।



