बिहार

बिहार की नीतीश सरकार की उम्मीद के अनुरूप काम कर रही SVU

पटना- 23 दिसम्बर। बिहार की नीतीश सरकार ने भ्रष्टाचार के लिए जीरो टालरेंस की नीति पर काम करते हुए विशेष निगरानी इकाई, निगरानी ब्यूरो और आर्थिक अपराध इकाई को भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई की खुली छूट दे रखी है। इन तीनों जांच एजेंसियों में से विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) को बड़े-बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई का जिम्मा दिया गया है। दो साल में एसवीयू ने रिकार्ड कार्रवाई की है। कार्रवाई की जद में एक कुलपति, तीन आईपीएस अधिकारी व एक आईएएस अधिकारी आये हैं।

पटना, 23 दिसम्बर (हि.स.)। बिहार की नीतीश सरकार ने भ्रष्टाचार के लिए जीरो टालरेंस की नीति पर काम करते हुए विशेष निगरानी इकाई, निगरानी ब्यूरो और आर्थिक अपराध इकाई को भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई की खुली छूट दे रखी है। इन तीनों जांच एजेंसियों में से विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) को बड़े-बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई का जिम्मा दिया गया है। दो साल में एसवीयू ने रिकार्ड कार्रवाई की है। कार्रवाई की जद में एक कुलपति, तीन आईपीएस अधिकारी व एक आईएएस अधिकारी आये हैं।

विशेष निगरानी इकाई ने बीते दो वर्ष में 23 केस दर्ज किया है। वर्ष 2022 में 17 कांड दर्ज हुए हैं। इनमें 20 केस तो आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने को लेकर हुई है। इसके अलावा तीन केस भ्रष्ट अधिकारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार होने के संबंध में दर्ज किया गया है।

एसवीयू ने ट्रैप के तीनों केस का अनुसंधान पूरा कर चार्जशीट भी दाखिल कर दिया है। वहीं, आय से अधिक संपत्ति के एक केस में भी आरोप पत्र समर्पित किया जा चुका है। साथ ही एक केस का अनुसंधान अंतिम चरण में है। संभावना है कि जनवरी 2023 में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के दूसरे केस में भी चार्जशीट दाखिल हो जाए।

विशेष निगरानी इकाई की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में जिन वीआईपी लोगों के खिलाफ विशेष निगरानी इकाई ने केस दर्ज कर छापेमारी की उनमें मगध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. राजेन्द्र प्रसाद भी शामिल हैं। इसके गया के पूर्व एसएसपी आदित्य कुमार, गया के पूर्व आईजी अमित लोढ़ा के खिलाफ भी केस दर्ज किया है।

पूर्णिया के एसपी रहे दयाशंकर के खिलाफ एसवीयू ने डीए केस दर्ज कर छापेमारी की थी। इसके अलावा गया के पूर्व डीएम अभिषेक सिंह के खिलाफ भी एसवीयू ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत केस दर्ज कर अनुसंधान कर रही है।

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