बिहार

बिना स्पष्टीकरण के निलंबन के खिलाफ नर्सों ने पीएचसी में जड़ा ताला, स्वास्थ्य सेवा सहित टीकाकरण कार्य प्रभावित

अररिया- 27 जून। कोरोना के बूस्टर डोज सहित टीकाकरण को लेकर एक और जहां बिहार सहित अररिया जिला में विशेष अभियान चलाया जा रहा है।दूसरी ओर अररिया जिला के एक केंद्र पर सोमवार को अभियान प्रभावित है।

अररिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नर्सों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बिना स्पष्टीकरण के निलंबन की कार्रवाई के खिलाफ ताला जड़ दिया है और अधिकारी सहित अपने विभाग के खिलाफ नारेबाजी कर रही है। प्रदर्शन कर रहे नर्सों के पीएचसी के मुख्य गेट पर ताला जड़ देने के कारण अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी बाहर है,जिसके कारण स्वास्थ्य सेवा सहित अन्य कार्यक्रम प्रभावित है।

प्रदर्शन कर रही नर्स का कहना है कि वे लोग अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा के साथ करते हैं। बावजूद इसके डाटा ऑपरेटर और सिस्टम की गड़बड़ी के कारण गलत डाटा और मैसेज जाने पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से बिना किसी पूर्व सूचना के बेवजह निलंबन की कार्रवाई कर दिया जा रहा है। जबकि उसमें एएनएम की कोई गलती नहीं होती है।

प्रदर्शनकारियों ने गलती करे कोई और सजा मिले किसी और को,के खिलाफ प्रदर्शन करने की बात कही। इन लोगों ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई कर उनका मनोबल को तोड़ने का काम कर रही है, जिसका वे लोग विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रही एएनएम आरती कुमारी ने बताया कि उनके नाम से जो यूजर और पासवर्ड जारी किया गया है। स्वयं उन लोगों को इसकी जानकारी नहीं है और जिला मुख्यालय से उस यूजर और पासवर्ड का उपयोग दूसरे लोग करते हैं और उनकी गलतियों का खामियाजा उन जैसे स्वास्थ्य कर्मचारियों को भुगतना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि वेलोग 25 किलोमीटर दूर तक काम करने के लिए जाते हैं और काम करने के बाद शाम को घर पहुंचने पर बिना किसी स्पष्टीकरण के निलंबन की खबर आती है।आरती के साथ अन्य प्रदर्शनकारी नर्सों ने निलंबित किए गए अपने साथियों के निलंबन को वापस लिए जाने की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। प्रदर्शन में शामिल एनएम सुनैना कुमारी ने बताया कि अवकाश पर रहने के बावजूद अवैध वसूली,दवा का सही रखरखाव नहीं होने सहित अन्य मिथ्या आरोप लगाकर अधिकारियों द्वारा नर्सों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।

सूचना के बाद मौके पर सिविल सर्जन डॉ बिधान चंद्र सिंह पहुंचे और प्रदर्शनकारी नर्सों से बातचीत की। सिविल सर्जन ने नर्सों को समझाने बुझाने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि स्पष्टीकरण का जबाब आने के बाद निलंबित कर्मियों का निलंबन वापस हो जाएगा।मामले पर बातचीत करते हुए सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने बताया कि अररिया सिविल कोर्ट के एडीजे धीरेन्द्र कुमार और उसकी पत्नी के मोबाइल और बूस्टर डोज के सफलतापूर्वक टीकाकरण का मेसेज आ गया था, जबकि उनके स्पष्ट कहना था कि उन्होने और उसकी पत्नी ने अबतक बूस्टर डोज लिया ही नहीं और वेलोग कोर्ट में ही डोज लेते हैं।जबकि बेलवा केंद्र पर सफलतापूर्वक डोज लेने का मैसेज आया था।इसी को लेकर निलंबन की कार्रवाई की गई।इसके अलावे भाजपा जिलाध्यक्ष संतोष सुराना ने भी अपने बेटे के पटना में होने के बावजूद मोबाइल पर मैसेज आ जाने की गलत सूचना मिली थी।पूरे जिले में इस तरह की गलत मैसेज और लापरवाही को रोकने के लिए इस तरह की कार्रवाई की गई है।जिससे कि इतने महत्वपूर्ण कार्यो के निष्पादन में किसी तरह की लापरवाही नहीं हो।उन्होंने टीकाकरण में लापरवाही की बात स्वीकारते हुए सभी पीएचसी प्रभारी को इस तरह की लापरवाही पर ध्यान देने का निर्देश दिया है।उन्होंने कहा कि जो भी दोषी होंगे उनको चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी और जो निर्दोष होंगे स्पष्टीकरण के संतोषप्रद जबाब के बाद निलंबन से उन्हें मुक्त कर दिया जाएगा।

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