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पटना हाई कोर्ट ने गायघाट उत्तर रक्षा महिला सुधार गृह मामले में किया रिपोर्ट तलब

पटना- 11 फरवरी। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पटना के गाय घाट स्थित उत्तर रक्षा महिला सुधार गृह (आफ्टर केअर होम ) मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इस संवेदनशील मामले का अनुसंधान डीएसपी रैंक की महिला पुलिस अधिकारी से ही करवाया जाय। इसके साथ ही कोर्ट ने बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार को कहा कि वह पीड़िता को हर संभव कानूनी सहायता तथा मदद जो उसे चाहिए मुहैया करावे।

मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश एस कुमार की खंडपीठ ने पटना के गाय घाट स्थित उत्तर रक्षा महिला सुधार गृह ,आफ्टर केअर होम में रहने वाली वासियों के साथ कथित तौर पर किये जा रहे उत्पीड़न,शारीरिक हिंसा और उनके साथ किये जा रहे दुर्व्यवहार के मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। कोर्ट ने सरकार को कहा कि अगली सुनवाई को महिला विकास मंच द्वारा दायर किये गए हस्तक्षेप याचिका पर जवाब दायर करे।कोर्ट ने समाज कल्याण विभाग समेत सभी संबंधित विभागों को कहा कि इस मामले में की गई करवाई की विस्तृत जानकारी अगली सुनवाई में कोर्ट को दें।

महाधिवक्ता ललित किशोर ने हाईकोर्ट को बताया कि इस मामले से संबंधित समाचार पत्र में खबर प्रकाशित होने के बाद दो बार समाज कल्याण विभाग ने इसकी जांच अपने स्तर से करवाई,लेकिन पता चला कि यह आरोप झूठा है।उन्होंने कोर्ट को बताया कि पीड़िता सात अप्रैल-2021 को यहां से जब चली गई तब जनवरी 2022 में इस तरह का आरोप लगाया है।उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में एक आपराधिक रिट याचिका इस तरह के मामले की जांच के लिए हाईकोर्ट में दायर की गई थी।

हाई कोर्ट के निर्देश के तीन सदस्यों की एक कमिटी इसकी जांच के लिए बनाई गई थी जिसमे दो महिला सदस्य शामिल थी।उस समय पीड़िता वहीं थी लेकिन उसने ऐसी कोई बात जांच कमिटी को नही बताई थी ।वर्ष 2022 में वहां से बाहर आ जाने के बाद इस तरह का आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि बावजूद इसके इस मामले की जांच करने के लिए दो दो अलग अलग प्राथमिकी दोनों पीड़ितों की तरफ से महिला थाना कांड संख्या -13/2022 और महिला थाना कांड संख्या-17/2022 के रूप में दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।पीड़िता का बयान भी लिया गया है।

महिला विकास मंच की ओर से अधिवक्ता मीनू कुमारी ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने पीड़िता की ओर से एक हस्तक्षेप याचिका दायर कर सभी बातों को उसमें कहा है।उन्होंने कहा कि पीड़िता भी उनके साथ उपस्थित है अगर कोर्ट चाहे तो सभी बातों की जानकारी वह स्वयं पीड़िता से अपने चैम्बर के प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि वीडियो को क्रांफ्रेसिंह के माध्यम से अगर पीड़िता सुनवाई में उपस्थित होती है तो सम्भव है कोई जो सुनवाई में शामिल है उसके फोटो को सोशल मीडिया पर डाल दें। इस पर खंडपीठ ने कहा कि उसे जो कहना है वह जांच एजेंसी के सामने अपनी बातों को कहे।

खंडपीठ ने महाधिवक्ता से पूछा कि इस मामले की जांच कौन अधिकारी कर रहा है उस पर अधिवक्ता मीनू कुमारी ने कोर्ट को कहा कि सब इंस्पेक्टर रैंक की अधिकारी इसकी जांच कर रही है।इसके बाद कोर्ट ने महाधिवक्ता को कहा कि वह यह जरूर सुनिश्चित करें कि इस मामले की जांच डीएसपी रैक की महिला अधिकारी द्वारा ही कराया जाय उसके नीचे के अधिकारी द्वारा नही।

उल्लेखनीय है कि समाचार पत्रों में इस मामले को लेकर छपी खबर के बाद पटना हाई कोर्ट की तीन जजों की जुवेनाइल जस्टिस मनिटरिंग कमेटी द्वारा इस मामले से संबंधित एक जांच रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश को सौंपी गई थी।उसी रिपोर्ट के आलोक में मुख्य न्यायाधीश के निर्देश के बाद यह मामला लोकहित याचिका के रूप में रजिस्टर्ड होकर मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में 2 फरवरी बुधवार को सूचीबद्ध हुआ था।

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