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नेपाल में राजनीतिक संकट गहराया, राष्ट्रपति और सेना ने की देशवासियों से शांति की अपील, PM ओली ने इस्तीफा देकर देश छोड़ा

काठमांडू- 09 सितम्बर। नेपाल इन दिनों भीषण राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा से जूझ रहा है। सोशल मीडिया प्रतिबंध के विरोध में भड़का ‘जेन-ज़ी आंदोलन’ लगातार उग्र होता गया और राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में तबाही मचा दी। हालात बेकाबू होते देख प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति, सेना और शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने देशवासियों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने की अपील की है।

सोशल मीडिया बैन से भड़का युवा आंदोलन—

सरकार की ओफर में फेसबुक, व्हाट्सएप और यूट्यूब सहित कई प्लेटफॉर्म्स पर अचानक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद ‘जेन-जी’ पीढ़ी सड़कों पर उतर आई। युवाओं ने इस कदम को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया, जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। आक्रोशित युवाओं ने संसद,प्रधानमंत्री निवास और सिंहदरबार सचिवालय में आगजनी और तोड़फोड़ की। हिंसक आंदोलन के दूसरे दिन आज कई मंत्रियों और नेताओं के घरों को भी निशाना बनाया गया। दो दिनों से जारी हिंसा में अब तक 20 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं।

पूर्व पीएम झालानाथ खनाल की पत्नी की मौत—

हिंसा के दौरान आज सबसे दर्दनाक घटना तब सामने आई जब पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनाल के निवास पर आगजनी की गई। इस दौरान उनकी पत्नी आग में झुलस गईं और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है।

पीएम ओली का इस्तीफा और सुरक्षित स्थान पर प्रस्थान—

विरोध और हिंसा की तीव्रता को देखते हुए प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने आज पद से इस्तीफा दे दिया और सेना के हेलीकॉप्टर से अपने निवास से किसी अज्ञात स्थान के लिए रवाना हो गए। इस्तीफा देने से पहले उन्होंने पीड़ित परिवारों को मुआवजा और घायलों को मुफ्त इलाज की घोषणा भी की।

राष्ट्रपति पौडेल ने की शांति की अपील—

देश में फैली अशांति के बीच राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने लिखित संदेश में देशवासियों से शा्ंति बहाली की दिशा में एकजुटता दिखाने की बात कही। उन्होंने अपने संदेश में लिखा, “मैं प्रदर्शनकारी नागरिकों समेत सभी से देश की कठिन परिस्थिति के शांतिपूर्ण समाधान में सहयोग करने का आग्रह करता हूं। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद मुझे विश्वास है कि सभी पक्ष देश,जनता और लोकतंत्र के प्रति प्रेम के कारण वर्तमान कठिन परिस्थिति को सुलझाने में सहयोग करेंगे। चूंकि लोकतंत्र में नागरिकों की उठाई गई मांगों का समाधान बातचीत और संवाद के जरिए किया जा सकता है,जिसमें जनप्रतिनिधियों की भागीदारी भी शामिल है। इसलिए मैं सभी पक्षों से संयम बरतने, देश की स्थिति को और बदतर न होने देने और बातचीत के लिए आगे आने की अपील करता हूं।”

नेपाली सेना और सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त अपील—

नेपाली सेना ने भी बयान जारी कर देश की स्वतंत्रता, संप्रभुता और जनता की सुरक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। सेना ने कहा कि आंदोलन के दौरान हुई जान-माल की अपूरणीय क्षति पर उन्हें गहरा दुख है। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। सेना ने युवाओं और नागरिकों से संयम बरतने तथा सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की ताकि हालात और बिगड़ें नहीं।

इसी क्रम में नेपाल सरकार के मुख्य सचिव एक नारायण आर्यल,सेनाध्यक्ष अशोक राज सिगदेल,गृह सचिव गोकर्णमणि दुबारी,सशस्त्र पुलिस बल के महानिरीक्षक राजू आर्यल, नेपाल पुलिस के महानिरीक्षक चंद्र कुबेर खापुंग और राष्ट्रीय जांच एजेंसी के प्रमुख हुतराज थापा ने भी संयुक्त बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि काठमांडू समेत देश के विभिन्न हिस्सों में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है और इस कठिन समय में सभी नागरिकों को संयम दिखाना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे संवाद के ज़रिए इस संकट का समाधान निकालें।

राजतंत्र की मांग और भविष्य की चुनौतियां—

लगातार बदलती सरकारों और बढ़ते भ्रष्टाचार से निराश जनता का एक हिस्सा अब राजतंत्र की बहाली की मांग कर रहा है। पिछले 17 वर्षों में नेपाल ने 13 से अधिक प्रधानमंत्रियों का बदलाव देखा है। राजनीतिक अस्थिरता और सत्ता संघर्ष से विकास कार्य प्रभावित हुए हैं।

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