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नेपाल में नागरिकता संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति ने लौटाया, भारत में हुई चर्चा

अररिया- 18अगस्त। नेपाल में बहुचर्चित नागरिकता संशोधन विधेयक राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी के द्वारा पुनर्विचार के लिए लौटा देने के बाद नेपाल के मधेशी समुदाय में विरोध है।राष्ट्रपति के इस कदम से सत्ता में रहे नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन के सामने भी एक तरह से संकट के बादल छा गए हैं।फलस्वरूप नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी और राष्ट्रपति भंडारी के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है।

गुरुवार को विराटनगर के नेपाल पत्रकार महासंघ के सभा भवन में नागरिक समाज के अध्यक्ष सूर्यनाथ सिंह के अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में रहे भारत नेपाल सामाजिक सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष राजेश कुमार शर्मा ने अपने सम्बोधन में कहा कि नेपाली संसद ने बीती 31 जुलाई को नागरिकता कानून संशोधन विधेयक पारित कर मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा था। इस विधेयक में ऐसे हजारों बच्चों को देश की नागरिकता मिलने का प्रावधान किया गया था, जिनकी माताएं शादी के वक्त विदेशी थी। इसके अलावा उन नेपाली महिलाओं से जन्मे बच्चों को भी नागरिकता मिल जाती, जिनके पिता की पहचान नहीं हो सकी है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नेपाल में नागरिकता विहीन नागरिकों की संख्या करीब 15 लाख के आसपास है जो नए कानून के अभाव में नागरिकता प्रमाण पत्र लेने से वंचित हैं।विधेयक से नेपाल में कई पीढ़ी से रह रहे नेपाली नागरिकों को बिना किसी व्यवधान के नागरिकता मिल पाती।

मंच के अध्यक्ष शर्मा ने कहा की इस नए नागरिकता बिल के पास होने से भारत से विवाह कर आने वाली बेटियों को सहज ढंग से ही नेपाल की वैवाहिक अंगीकृत नागरिकता मिलने का रास्ता खुल जाता।सन् 2015 में जब नेपाल में नया संविधान जारी किया गया था उस समय भारतीय महिलाओं के नेपाल में शादी करने के बाद नागरिकता के पुराने प्रावधान को खत्म कर दिया गया था।उसके बाद केपी ओली सरकार के समय भारतीय महिलाओं को नेपाल में शादी करने के 7 साल के बाद नागरिकता देने का प्रावधान सहित का नागरिकता बिल संसद में पेश किया गया था।

मधेशी दलों के विरोध के कारण इस बिल को संसदीय समिति में पास होने के बावजूद संसद के किसी भी सदन में पेश तक नहीं किया जा सका।बाद में वर्तमान देउवा सरकार ने पुराने बिल को वापस लेने का निर्णय करते हुए नया बिल लेकर आई और संसद से उसे पारित भी करवा दिया था,लेकिन राष्ट्रपति के द्वारा ख़ारिज करने के बाद इसमें पानी फिर गया।

नेपाल में नागरिकता कानून में पिछली सरकार के कारण दोनों देशों के बीच रहे पारिवारिक रिश्तों पर असर हुआ है नेपाल के नए संविधान में नेपाल में शादी करके आने वाली महिलाओं को न सिर्फ नागरिकता से वंचित कर दिया गया था।बल्कि उनके राजनीतिक अधिकार भी खत्म कर दिया गया। 2015 के बाद नेपाल और भारतीय सीमावर्ती क्षेत्रों में जो वैवाहिक रिश्ता बनता था।उसमें एका-एक 80 फिसदी तक की गिरावट आ गई है।

कार्यक्रम में नेपाल के तरफ से बुद्धिजीवी राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, अधिवक्ता राज नारायण चौधरी, बुद्धिजीवी गंगा प्रसाद यादव, ममता यादव, सहित दर्जनों राजनीतिक सामाजिक व्यक्ति ने अपने विचार रखे।

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