
नहाय-खाय के साथ शुरु होगी छठ, मुख्य पर्व 10 को
मधुबनी- 07 नवम्बर। छठ पर्व की तैयारियां मिथिलांचल सहित पूरे बिहार राज्य में शुरू हो गई हैं। यह पर्व दीपावली के बाद कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने की परम्परा इस पर्व की विशेषता है। हालांकि इसमें उदय होते सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है। यह मुख्यतः व्रत पर्व है। छठ का मुख्य पर्व 10 नवम्बर को है। छठ पर्व को लेकर भक्तों में उत्साह झलक रहा है। आठ नवम्बर को नहाय-खाय से पर्व की शुरुआत होगी। इसके बाद 11 नवम्बर को उदय होते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण किया जाएगा। चार दिवसीय यह बड़ा तप साध्य व्रत है। यह मुख्यतः बिहार प्रान्त का पर्व है, परंतु अब यह उत्तर भारत सहित देश विदेश में भी पूरे भक्तिभाव से मनाया जाता है।
पहला दिन नहाय-खाय—
छठ पूजा के प्रथम दिन नहाय-खाय से इसकी शुरुआत होती है। व्रती इस दिन जलाशयों व घरों में स्नान के बाद भगवान भास्कर को जल अर्पण करने के उपरांत भोजन ग्रहण करते हैं। इस दिन व्रत करने वाले लोग भोजन में अरवा चावल, अरहर की दाल, कद्दू की सब्जी,सेंधा नमक लेते हैं। वहीं रात के समय भी व्रती यही भोजन ग्रहण करते हैं।
दूसरा दिन खरना—
इस दिन साफ-सफाई और स्नान के बाद सूर्य देव को साक्षी मानकर व्रती महिलाएं व्रत का संकल्प लेती हैं। चने की सब्जी, चावल और साग का सेवन करने के बाद व्रत की शुरुआत करती हैं। छठ पर्व का दूसरा दिन खरना कहलाता है। पूरे दिन महिलाएं व्रत रखती हैं। शाम को मुख्य रूप से गुड़ की खीर बनाई जाती है।
तीसरा दिन खास छठ,इस अस्त होते सूर्य को देते हैं अर्घ्य—
छठ पूजा का तीसरा दिन खास छठ कहलाता है। इस दिन शाम के समय महिलाएं किसी तालाब या नदी के घाट पर जाती हैं। यहां छठ पूजा बेदी पर छठी मैया की पूजा-अर्चना करने के बाद पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। अर्घ्य देने के बाद घाट से वापस जाकर घर पर कोसी भरने की परंपरा है। मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति मन्नत मांगता है। तथा वह पूरी हो जाती है तो वह कोसी भरता है।
विशेष रिपोर्ट- आकिल हुसैन।



