बिहार

देश में निजीकरण को बढ़ावा देकर सरकार पुनः लोगों को गुलाम बनाना चाह रही है: D. राजा

बेगूसराय- 28 सितम्बर। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) का 30वां राष्ट्रीय सम्मेलन गुरुवार को शिक्षा बचाओ देश बचाओ महारैली एवं मार्च के साथ शुरू हो गया। करीब 20 हजार छात्रों का जुलूस जीडी कॉलेज से पटेल चौक, काली स्थान, कचहरी रोड, अंबेडकर चौक, सुभाष चौक से हर-हर महादेव चौक होते हुए जीडी कॉलेज पहुंचकर महारैली में तब्दील हो गया।

मार्च का नेतृत्व संगठन के बिहार राज्य सचिव आमीन हमजा एवं बेगूसराय जिलाध्यक्ष अमरेश कुमार ने किया। मार्च के दौरान नई शिक्षा नीति वापस लो, भगत सिंह रोजगार गारंटी कानून बनाओ, सबको शिक्षा सबको काम देना होगा, बेगूसराय में राष्ट्रकवि दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय बनाना होगा, पुनः तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम लागू करो, राष्ट्रपति हो या चपरासी की संतान सबको शिक्षा एक समान आदि गगनभेदी नारा से पूरा बेगूसराय गूंजता रहा।

मार्च के बाद जीडी कॉलेज में एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शुभम बनर्जी की अध्यक्षता में सभा का आयोजन हुआ। आमसभा को संबोधित करते हुए यूथ फेडरेशन के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व सांसद डी. राजा ने कहा कि केंद्र सरकार शिक्षा रोजगार विरोधी है। प्रतिवर्ष दो करोड़ नौजवानों को रोजगार देने का वादा करके सत्ता में आई भाजपा देश के सरकारी संस्थाओं को बेचकर रोजगार के अवसर को समाप्त कर रही है। सरकारी संसाधनों को बेचकर ईस्ट इंडिया कंपनी के तर्ज पर देश को अंबानी और अडानी के हाथों में सौंपना चाह रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार के कामों से यह प्रतीत होता है कि देश के अंदर सार्वजनिक शिक्षा को समाप्त करेगी। सार्वजनिक रोजगार के अवसर को भी समाप्त कर देगी। देश में निजीकरण को बढ़ावा देकर सरकार पुनः यहां के लोगों को गुलाम बनाना चाह रही है। सभी केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय की स्थिति खराब कर दी गई है। एआईएसएफ के छात्रों को सार्वजनिक शिक्षा को बचाना होगा। सबको शिक्षा-सबको काम मिले, इसके लिए अपने संघर्षों को और तेज करना होगा।

पूर्व सांसद एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा कि पूरे दुनिया में भारत का शैक्षिक स्तर हमेशा उम्दा रहा है। लेकिन मोदी राज में शिक्षा के स्तर का ह्रास हुआ है। लगातार शिक्षक और छात्रों के साथ भाजपा की सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। शिक्षा नीति-2020 छात्रों के शैक्षणिक स्तर को बढाने के बदले ह्रास करेगी। छात्रों और देश को यह शिक्षा नीति पीछे ले जाएगी। इसे अविलंब खारिज करना होगा और बेहतर वैज्ञानिक शिक्षा को बढ़ावा देने वाला शिक्षा नीति बनाना होगा।

देश की आजादी के बाद से ही बेगूसराय में दिनकर विश्वविद्यालय की मांग यहां के छात्र कर रहे है। लेकिन सरकार संज्ञान नही ले रही है। बेगूसराय में दिनकर विश्वविद्यालय हमारा संवैधानिक अधिकार है। दिनकर विश्वविद्यालय बनने से छात्रों को उच्च शिक्षा मिलने में काफी आसानी होगी। सरकार को देश के अंदर सामान शिक्षा-स्वास्थ्य प्रणाली लागू करना होगा। राष्ट्रपति और चपरासी की संतान भी जब एक स्कूल में पढ़ेंगे, एक अस्पताल में उसका उपचार होगा, तब शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति सुधरेगी।

सरकार सबको शिक्षा और उसके योग्यता के अनुसार काम सुनिश्चित करे। इसके लिए भगत सिंह रोजगार गारंटी योजना कानून बनाना होगा। चार वर्षीय स्नातक कोर्स छात्र हित में नहीं है, पुनः तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को लागू करना होगा। बेहतर शैक्षणिक माहौल के लिए सभी शैक्षिक संस्थानों में छात्र संघ चुनाव कराना होगा। संगठन की यह महारैली और सम्मेलन देश के शिक्षा और रोजगार को बचाने के लिए मील का पत्थर शामिल होगा।

महारैली को संगठन के राष्ट्रीय महासचिव विक्की महेश्वरी, सांसद पी. संतोष, एआईवाईएफ के राष्ट्रीय महासचिव आर. तिरमिलैय, संगठन के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव विजेन्द्र केशरी एवं विश्वजीत कुमार, तेघड़ा विधायक रामरतन सिंह, बखरी विधायक सूर्यकांत पासवान, पूर्व विधायक रामनरेश पांडेय, अवधेश राय, राजेन्द्र सिंह, पूर्व विधान पार्षद संजय यादव, रामकृष्ण पांडा, प्रदेश अध्यक्ष रजनीकांत यादव एवं संयुक्त सचिव राकेश कुमार आदि ने भी संबोधित किया।

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